जापान की रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव: अब घातक हथियारों के निर्यात को मिली मंजूरी…

टोक्यो: जापान की रक्षा नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जापान ने मंगलवार को खतरनाक जानलेवा हथियारों के निर्यात पर लगा बैन हटा दिया है। यह उसके युद्ध के बाद की शांतिवादी नीति में एक बड़ा बदलाव है। जापान अब चीन और उत्तर कोरिया की आक्रामकता को देखते हुए अपने हथियार उद्योग को मजबूत करने में जुट गया है।
प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के मंत्रिमंडल की ओर से नई गाइडलाइन को मंजूरी मिलने से कई हथियारों की बिक्री में आने वाली आखिरी रुकावटें भी दूर हो गई हैं, जिनमें अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान और कॉम्बैट ड्रोन शामिल हैं।
चीन ने की आलोचना
चीन ने जापान के इस नीतिगत बदलाव की आलोचना की लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसे जापान के रक्षा सहयोगियों ने इसका बड़े पैमाने पर स्वागत किया है। दक्षिण-पूर्व एशिया समेत यूरोप ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है। विरोधियों का कहना है कि यह बदलाव जापान के शांतिवादी संविधान का उल्लंघन करता है और इससे वैश्विक तनाव बढ़ेगा। जापानी लोगों की सुरक्षा को खतरा पैदा होगा।
‘तेजी से बदल रहा है सुरक्षा माहौल’
मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने पत्रकारों से कहा, “नई नीति जापान की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और इस क्षेत्र समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शांति और स्थिरता को और बढ़ावा देगी, क्योंकि हमारे देश के आसपास का सुरक्षा माहौल तेजी से बदल रहा है।”
उन्होंने कहा, “सरकार रक्षा उपकरणों के हस्तांतरण को रणनीतिक रूप से बढ़ावा देगी, ताकि एक ऐसा सुरक्षा माहौल बनाया जा सके जो जापान के लिए अनुकूल हो और एक ऐसा औद्योगिक आधार तैयार किया जा सके जो युद्धक क्षमता को सहारा दे सके।”
जापान ने लगा रखी थी रोक
जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने अपने शांतिवादी संविधान के तहत लंबे समय तक अधिकांश हथियारों के निर्यात पर रोक लगा रखी थी। उसने हाल ही में बढ़ते वैश्विक और क्षेत्रीय तनावों के कारण कुछ बदलाव किए थे, लेकिन निर्यात केवल 5 क्षेत्रों तक सीमित था। बचाव, परिवहन, चेतावनी, निगरानी और बारूदी सुरंगों को हटाना।
नई गाइडलाइन इन सीमाओं को खत्म करती है और लड़ाकू विमान, मिसाइल और विध्वंसक जैसे उपकरणों के निर्यात की अनुमति देती है। यह बड़ा बदलाव है और निर्यात केवल उन 17 देशों तक सीमित रहेगा जिन्होंने जापान के साथ रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
जापान में बदल रहे हालात
जापान के घरेलू रक्षा उद्योग को लंबे समय से एक बुरा निवेश माना जाता रहा है। यह उद्योग सिर्फ ‘सेल्फ-डिफेंस फोर्स’ और रक्षा मंत्रालय की जरूरतों को पूरा करने तक ही सीमित था लेकिन, अब यह स्थिति बदल रही है। चीन, उत्तरी कोरिया और रूस से मिल रही धमकियों का सामना करने के लिए जापान अपनी सेना और रक्षा उद्योग को तेजी से मजबूत कर रहा है ताकि वह किसी भी आक्रामकता का जवाब देने में सक्षम हो।
जापान और ऑस्ट्रेलिया क्या कर रहे?
ऑस्ट्रेलिया ने जापान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा अपग्रेड किए गए ‘मोगामी-क्लास’ के 3 फ्रिगेट ऑस्ट्रेलिया को दिए जाएंगे और 8 अन्य फ्रिगेट दोनों देश मिलकर बनाएंगे। ऑस्ट्रेलिया ने टोक्यो की इस नई नीति का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम बताया है।
न्यूजीलैंड ने भी इन जापानी फ्रिगेट में अपनी दिलचस्पी दिखाई है। अधिकारियों ने बताया कि फिलिपींस और इंडोनेशिया समेत कई अन्य देशों ने भी जापान के रक्षा उपकरणों में अपनी रुचि जाहिर की है।
NATO के प्रतिनिधियों ने किया जापान का दौरा
इस बीच यहां यह भी बता दें कि, पिछले हफ्ते NATO के 30 प्रतिनिधियों का एक समूह जापान के दौरे पर आया था। इस दौरे का मकसद दोनों पक्षों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा करना था। इस समूह ने ‘मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक कॉर्प’ की एक सहायक कंपनी का दौरा किया। यह कंपनी 3 देशों के साझा लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट का हिस्सा है और अपनी सैटेलाइट तकनीक के लिए भी जानी जाती है।
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