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स्व. सरदार दलबीर सिंह ( वीरा सिंह ): उदारता और सरलता की मिशाल

भिलाई – हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी के संस्थापक वीरा सिंह, इस नाम से भिलाई का ऐसा कोई शख्स नहीं जो वाकिफ न हो। स्व. दलबीर सिंह उर्फ़ वीरा सिंह जो अपनी लगन और मेहनत से न केवल ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में बुलंदियों को छुआ बल्कि उसके साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई। यह वह शख्सियत है जो 2 साल की उम्र में अपने पिता के साथ पंजाब से भिलाई आये और यहीं के होकर रह गये।

इनका जन्म 6 जुलाई 1957 को पंजाब जिला के गुरदासपुर स्थित हरगोविंदपुर में छोटे से किसान परिवार में हुआ। इनके पिता पिता स्वर्गीय स्वर्ण सिंह नौकरी की तलाश में भिलाई आए थे। आरंभिक बचपन काल से वीरा सिंह मेहनती स्वभाव के थे इसलिये स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने पिता के साथ खेती के कार्य में भी हाथ बटाया करते थे। इस तरह उनकी रुचि पढ़ाई से अधिक कृषि कार्यों में ही हुआ करती थी। फलस्वरूप वीरा सिंह ने मैट्रिक की पढ़ाई छोड़कर खेती किसानी के साथ-साथ सेक्टर 6 एवं छावनी में गन्ना रस का ठेला लगाना शुरू किया और उसमें उपयोग होने वाला गन्ना उनके खेतों से ही आता था।

पूर्ण युवा होने की अवस्था में उन्होंने एक ट्रैक्टर ट्राली खरीदकर भिलाई इस्पात संयंत्र में ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय प्रारंभ किया. यह सन 1985 का समय था जब उन्होंने ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में अपना कदम रखा। अपनी लगन और मेहनत से उन्होंने दो दशक के अंदर 1000 से अधिक गाड़ियों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। वीरा सिंह को ट्रांसपोर्ट व्यवसायी के रूप में ही नहीं उदार दिल के साथ-साथ हर वर्ग की सहायता एवं मिलनसारिता के रूप में विशेष रूप से जाना और पहचाना जाता है क्योंकि  नाम, शोहरत और पैसा सब कुछ पा लेने के बाद भी वो जमीन से जुड़े हुए इन्सान थे, उन्हें किसी तरह का कोई घमंड ना था।

उदारता और सरलता की मिशाल स्व. सरदार दलबीर सिंह ( वीरा सिंह ) के दरवाजे से कोई भी जरुरतमंद व्यक्ति किसी भी सहायता के लिए कभी खाली हाथ वापस नहीं हुआ। आज भिलाई के कई व्यक्ति उनकी सहायता से आज अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। इस प्रकार जीवन के सारे उतार-चढ़ाव को पार कर दिनांक 3 अक्टूबर 2019 को इलाज के दौरान मात्र 62 वर्ष की उम्र में उनका स्वर्गवास हो गया। उनके सत्कर्मों एवं हर क्षेत्र में सकारात्मक कर्मों  को भूलाया नहीं जा सकता और आज भी वह भिलाई वासियों के दिलों में जिंदा है। विनम्र श्रद्धांजलि…

 

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