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बीएमडीसी में “स्मेल्टिंग चेंज: एआई रेडीनेस फॉर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन” विषय पर दो-दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ…

सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र के भिलाई मैनेजमेंट डेवलपमेंट सेंटर (बीएमडीसी) में 15 मई 2026 को “स्मेल्टिंग चेंज: एआई रेडीनेस फॉर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन” विषय पर दो – दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संगठन के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के बीच डिजिटल दक्षताओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रेडीनेस, साइबर सुरक्षा जागरूकता तथा कार्यस्थल स्वचालन संबंधी कौशल का विकास करना है।

यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को उभरती डिजिटल तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराते हुए कार्यस्थल उत्पादकता एवं परिचालन दक्षता को सुदृढ़ करने की दिशा में केंद्रित है। कार्यक्रम का उद्घाटन महाप्रबंधक (मानव संसाधन- ज्ञानार्जन एवं विकास, बीएमडीसी), सौरभ वार्ष्णेय द्वारा किया गया।

अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने भविष्य उन्मुख कार्यबल के निर्माण में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं साइबर सुरक्षा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को तकनीकी परिवर्तनों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने तथा डिजिटल क्षमताओं को निरंतर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का समन्वय अभिनव विश्वकर्मा द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम का संचालन सुश्री महिमा ठाकुर ने किया।

कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों का संचालन विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है। सहायक प्रबंधक (एसपी-3) कुशांक पटेल द्वारा क्लाउड कम्प्यूटिंग एवं गूगल क्लाउड, पूर्व महाप्रबंधक (ए एंड डी) एम. पी. सिंह द्वारा कार्यस्थल पर साइबर सुरक्षा, वरिष्ठ प्रबंधक (यूनिवर्सल रेल मिल) सुधांशु जमवाल द्वारा जेनरेटिव एआई एवं बेसिक मशीन लर्निंग तथा वरिष्ठ प्रबंधक (ईएमडी) पी. अनु द्वारा डेटा एनालिटिक्स, ऑटोमेशन एवं पाइथन की मूलभूत जानकारी पर सत्र लिए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में आधुनिक डिजिटल टूल्स के व्यावहारिक उपयोग, हैंड्स-ऑन लर्निंग तथा कार्यस्थल की समस्याओं के समाधान आधारित दृष्टिकोण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिससे प्रतिभागियों को तकनीकी विषयों की बेहतर समझ विकसित करने में सहायता मिल रही है।

एचआर-एलएंडडी विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम संगठन के व्यापक डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन विज़न के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। यह पहल डिजिटल रूप से सक्षम कार्यबल विकसित करने, तकनीकी अपनाने की क्षमता को सुदृढ़ करने, परिचालन दक्षता बढ़ाने तथा नवाचार आधारित कार्यसंस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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