
दुर्ग- जिले के भिलाई स्थित महात्मा गांधी कला मंदिर में आज औद्योगिक विकास नीति 2024-30, रैम्प तथा इज ऑफ र्डूइंग बिजनेस पर संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम के अध्यक्ष कलेक्टर अभिजीत सिंह अपने सम्बोधन में कहा कि देश और प्रदेश के विकास में उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान है।
शासन की मंशा है कि प्रदेश की जीडीपी में औद्योगिक समूह का योगदान भी हो। प्रदेश की नई औद्योगिक विकास नीति में कई ऐसे प्रावधान है, जो उद्योगों को बढ़ावा देने में सहयोगी है। इससे सकारात्मक माहौल निर्मित होगा और उद्योग व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
कलेक्टर ने कहा कि सन् 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में प्रदेश की औद्योगिक नीति यहां के उद्यमियों के लिए सहायक होगी। उन्होंने कहा कि जिले में औद्योगिक विकास हेतु जिला प्रशासन यहां के उद्योगपतियों को हर संभव सहयोग करेगी।
कार्यशाला में केन्द्र सरकार द्वारा एम.एस.एम.ई. उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जारी रैम्प स्कीम की विस्तृत जानकारी ई.वाय. की टीम द्वारा दी गई। साथ ही राज्य की नवीन औद्योगिक विकास नीति-2024-30 के अंतर्गत रोजगार रणनीति, नवीन पहल, समग्र औद्योगिक विकास, सूक्ष्म, लघु, मध्यम व वृहद उद्यम, औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन तथा विशिष्ट उत्पाद श्रेणी के वृहद उद्यमों के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पर परिचर्चा कर प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया।
औद्योगिक विकास नीति के विशेष प्रावधान – नीति से राज्य के युवाओं के लिए कौशलयुक्त रोजगारों का सृजन करते हुए अगले 5 वर्षों में 5 लाख नए औपचारिक क्षेत्रों में रोजगार का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय श्रमिकों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए प्रशिक्षण कर प्रोत्साहन का प्रावधान करते हुए 1000 से अधिक रोजगार प्रदाय करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहन के अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
युवा अग्निवीरों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को स्वयं के रोजगार स्थापित करने पर अनुदान एवं छूट का प्रावधान किया है। कार्यशाला में एसडीएम हरवंश सिंह मिरी, डिप्टी कलेक्टर हितेश पिस्दा, मुख्य महाप्रबंधक उद्योग सीमन एक्का, उद्योग संचालनालय के अधिकारी ऋतुराज, संभाग के सभी जिलों के महाप्रबंधक उद्योग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के उद्यमी उपस्थित थे।
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