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सीटू ने किया लंबित मांगों के जल्द निराकरण के किया प्रदर्शन…

छत्तीसगढ़ / आज 8 फरवरी को प्रबंधन ने बोनस के फार्मूले पर चर्चा करने के लिए एनजेसीएस सब कमेटी की बैठक बुलाई है पिछले साल हुए बोनस समझौता का एक किस्त भुगतान होने के बाद दूसरा किस्त अभी भी भुगतान होना बाकी है वही आधे अधूरे एमओयू के तहत मिलने वाले 39 माह का एरियर रात्रि पाली भत्ता सहित कई मांगे अभी भी लंबित है.

ऐसे में सीटू ने लंबित मांगों के जल्द से जल्द निराकरण की मांग को लेकर भिलाई इस्पात संयंत्र सहित सेल के विभिन्न इकाईयों में प्रदर्शन किया भिलाई में प्रदर्शन के पश्चात औद्योगिक संबंध विभाग के माध्यम से सेल चेयरपर्सन को पत्र भेजा गया.

मुद्दों को जानबूझकर उलझाता है कार्मिक विभाग

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू अध्यक्ष विजय कुमार जांगड़े ने कहा कि भिलाई स्पात संयंत्र का कार्मिक विभाग हो या सेल का कार्मिक विभाग हो जानबूझकर मुद्दों को उलझाना इनकी आदत सी बन गई है कर्मी जिन मांगों को लेकर आंदोलित रहता है कार्मिक प्रबंधन ठीक उसके उलट दूसरी बात करने लगता है.

कर्मियों को गोल गोल घुमाना एवं मुद्दों को जानबूझकर भटकाना ही इनका काम रह गया है जिसके कारण कर्मी तो परेशान है ही साथ ही साथ वर्क्स मैनेजमेंट भी परेशान रहता है क्योंकि जब कर्मी परेशान रहते हैं तो उसका समाधान वर्क्स मैनेजमेंट के पास नहीं होता जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ता है.

बोनस फार्मूले के साथ बकाया एरियर देने पर हो निर्णय

सीटू महासचिव जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी ने कहा कि लंबे समय से बोनस फार्मूला बनाने की बात हो रही है किंतु अब तक जैसे ही बोनस की बैठक शुरू होती है फार्मूले को बाद में बनाने की बात कह कर टाल दिया जाता रहा है इसीलिए आज की बैठक में बकाया बोनस के भुगतान के घोषणा के साथ-साथ आने वाले समय में बोनस देने के लिए फार्मूला बनाया जाना आवश्यक है साथ ही साथ बकाया एरियर देने के संदर्भ में भी निर्णय लिया जाना चाहिए ताकि कर्मियों का मनोबल बढ़ सके.

प्रबंधन का अमानवीय चेहरा है रात्रि पाली भत्ता बढ़ाने को टालमटोल करना

सीटू नेता डीवीएस रेड्डी ने कहा की वेतन समझौता के साथ ही रात्रि पाली भत्ता बढ़ाने के संदर्भ में चर्चा कर तय किया जाना चाहिए था किंतु प्रबंधन इस मुद्दे पर लगातार टालमटोल कर रही है एक बात बता दें कि रात्रि पाली भत्ता का एरियर नहीं दिया जाता है वर्तमान में रात्रि पाली भत्ता ₹90 है अर्थात रात्रि पाली भत्ता बढ़ाने पर जब सहमति होगी तभी से वह भत्ता कर्मियों को मिलने लगेगा प्राकृतिक नियमों के विपरीत रात को काम करने के एवज में वेतन के अलावा अतिरिक्त रात्रि पाली भत्ता दिया जाता है इसीलिए इस भत्ते को बढ़ाने के संदर्भ में टालमटोल करना प्रबंधन के अमानवीय चेहरे को ही उजागर करता है.

इस्पात मंत्री ने भी कहा था पूर्ण हो गया है वेतन समझौता

सीटू नेता पी वेंकट ने कहा की संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में इस्पात मंत्री ने कहा था कि सेल के अंदर विभिन्न इकाइयों में कार्यरत कर्मियों के वेतन समझौते से जुड़े हुए सारे मुद्दे हल कर लिए गए हैं अब प्रबंधन कर्मियों का किसी तरह का कोई बकाया नहीं है मंत्री जी के इस बयान का वीडियो भी खूब वायरल हुआ था सच्चाई यह है कि जिस वेतन समझौता के पूर्ण हो जाने की बात मंत्री जी ने कही थी.

वह बात दरअसल संसद में पूछे गए सवाल पर उत्तर देने के लिए सेल के उच्च अधिकारी अथवा इस्पात मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के द्वारा तैयार करके दिया गया जवाब होता है अर्थात उस जवाब के माध्यम से ना केवल संसद को गुमराह किया गया बल्कि सारे कर्मियों को भी आईना दिखाने की कोशिश की गई.

3 महीना बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस

ज्ञात हो कि वर्तमान सेल चेयरपर्सन अपने पद ग्रहण करते समय यह कही थी कि 3 माह के अंदर वेतन समझौता से जुड़े हुए मुद्दों को हल कर लिया जाएगा एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद भी नवंबर 2021 से आगामी 3 माह में सभी लंबित मुद्दों को हल कर लेने की बात कही गई थी पूर्व चेयरमैन ने भी उनके रहते रहते वेतन समझौता पूर्ण कर लेने की बात कही थी किंतु स्थिति अभी भी जस की तस है.

कर्मी आधे अधूरे वेतन समझौते का आधा अधूरा लाभ ही ले पा रहे हैं 39 माह का एरियर नदारद है वर्तमान बेसिक पर एचआरए का कोई अता पता नहीं है रात्रि पाली भत्ता चर्चा से ही गायब है ग्रेच्युटी को प्रबंधन द्वारा मनमाने तरीके से एक तरफा सीलिंग कर दिया गया है एनजेसीएस से जुड़े अन्य मुद्दे चर्चा से ही बाहर है जबकि इन सारे मुद्दों का जल्द से जल्द निराकरण किया जाना आवश्यक है.

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