कानों को मधुर लगने वाले गीत ही लोक गीत कहलाते हैं: रजनी रजक…

छत्तीसगढ़ / शिक्षा के साथ छत्तीसगढ़ी लोक कला व संस्कृति को समायोजित करने की दृष्टि से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान अछोटी दुर्ग के प्राचार्य डॉ. रजनी नेलशन के मार्गदर्शन व कला शिक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी व्ही. व्ही. आर. मूर्ति के संयोजन में तीन दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन समग्र शिक्षा द्वारा संचालित संदीपनी बालक छात्रावास फरीद नगर सुपेला में किया गया है ।
प्रशिक्षण के द्वितीय दिवस के मौके पर देवेंद्र कुमार बंछोर ने जापानी कला ओरिगामी, मिलिंद कुमार चंद्रा ने बिहार के मधुबनी लोक चित्र कला,लाखेश्वर साहू ने राजस्थान के बांधनी वस्त्र अलंकरण, राम कुमार वर्मा ने मुखौटा कला व युगलकिशोर देवांगन ने पुतली कला के सैद्धांतिक और प्रायोगिक अभ्यास शिक्षकों को कराया । मध्यांतर पश्चात छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध ढोला मारू लोकगाथा व लोक गायिका रजनी रजक द्वारा छत्तीसगढ़ की लोक गीतों सांगीतिक प्रस्तुति दी ।
श्रीमती रजक ने प्रतिभागियों से सीधे संवाद करते हुए लोकगीतों को परिभाषित करते हुए कहा कि जो गीत कानों को बेहद प्रिय लगते व आकर्षित करते हैं, वही लोकगीत की श्रेणी में आते हैं। छत्तीसगढ़ी लोक गीतों की विष्टिताओं की चर्चा करते हुए इसकी वास्तविक समझ बच्चों तक हस्तांतरित करने तथा बालमन को प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक विधाओं के साथ जोड़ने की अपील की ।
इस अवसर पर डॉ. रजनी नेलशन ने डाइट परिवार की ओर से श्रीमती रजक को श्रीफल, शाल व लेखनी भेंट कर सम्मानित किया । इनकी संगीत प्रस्तुति में लाखेश्वर साहू, वरुण निषाद व टीकम सिंह साहू ने तबला वादन में सहयोग किया । इस कार्यशाला को संयोजित करने में डाइट के व्याख्याता आर .के. चंद्रवंशी, नीलम दुबे, डॉ वंदना सिंह, अनुजा मुर्रेकर सहित छात्रावास के अधीक्षक धर्मजीत साहू, रवि दुबे, शत्रुघ्न सिन्हा, मनीष सहित प्रतिभागी शिक्षिका डॉ. दुलारी चंद्राकर, संगीता चंद्राकर, ममता वर्मा, नंदिनी देशमुख,टामीन वर्मा, संध्या पाठक नीता त्रिपाठी, संजय गौतम ,ईश्वरी ठाकुर, शशि कला पांडेय, अशोक कुमार साहू, जागेश्वरी वर्मा,मंजू सिंह, मधु साहू, वंदना वर्मा, राजेश कुमार आदि ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
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