
ग्रेटरनोएडा के दादरी एनटीपीसी प्लांट में डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम) सतीश कुमार सिंह ने कूलिंग टावर में कूदकर जान दे दी। अधिकारी की कार और मोबाइल प्लांट के अलग-अलग स्थान पर पड़े मिले तो उनकी तलाश की गई। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद रात में शव मिल गया। इसके बाद यूनियन के पदाधिकारियों ने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया और पत्नी के लिए नौकरी की मांग की। सतीश की 13 साल और 10 साल की दो बेटियां हैं।
पांच घंटे तक चला सर्च आपरेशन
शुक्रवार दोपहर सतीश लंच करने घर नहीं गए। परिजनों ने जब मोबाइल पर कॉल की तो बात नहीं हो पाई। दोपहर बाद परिजनों ने एनटीपीसी के अधिकारियों और पुलिस को सतीश से संपर्क न होने की सूचना दी। इसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम एनटीपीसी परिसर में पहुंची। जांच के दौरान उनकी कार प्लांट में मिली, जबकि मोबाइल कार से कुछ दूरी पर पड़ा था। पांच घंटे बाद देररात उनका शव एनटीपीसी चिमनी को ठंडा करने के लिए बनाए गए कूलिंग टावर में मिला जो कि बर्फ से जम चुका था।
कोयले की ट्रेन खाली कराने का था काम
मूलरूप से वाराणसी के रामपुर निवासी सतीश एनटीपीसी टाउनशिप में ही परिवार के साथ रहते थे। तीन साल पहले ही वे यहां आए थे। सतीश एमजीआर विभाग में तैनात थे। कोयले से भरी ट्रेन खाली कराने का पूरा जिम्मा उन पर ही था। एडीसीपी विशाल पांडेय के मुताबिक, पत्नी ने पूछताछ में आरोप लगाया है कि सतीश कुछ समय से काम के दबाव से तनाव में थे। वह कई बार परिवार से कह चुके थे कि अब वह काम नहीं कर पाएंगे। इसी तनाव के कारण उन्होंने आत्महत्या की है।
समय पर खाली नहीं होने पर लगता है जुर्माना
हर रोज एनटीपीसी में कोयले की ट्रेन आती है। यदि इसे खाली करने में देर हो जाती है तो लाखों रुपये का जुर्माना लगता है। इस वजह से सतीश पर ट्रेन को कम समय में खाली कराने दबाव रहता था। कई बार जुर्माना लगने से अधिकारी उन्हें चेतावनी दे चुके थे।
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