रूस को भी चुकानी पड़ रही जंग की कीमत, महंगाई 45% बढ़ी, पैसे निकालने पर भी लगी लिमिट

रूस में खाने के सामानों की कीमत में 45% तक की बढ़ोतरी हुई है. इतना ही नहीं टेलीकॉम, मेडिकल, ऑटोमोबाइल, एग्रीकल्चर और इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में आम आदमी की कमर टूट गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक पाबंदियों की वजह से रूसी मुद्रा रूबल की वैल्यू डॉलर की तुलना में 30% तक नीचे आ गई. ऐसे में रूस में खाने के सामानों की कीमत में 45% तक बढ़ोतरी हो गई. जो ग्रॉसरी का सामान पहले 3,500 रुपये में मिल रहा था, अब वह 5,100 में मिल रहा है.
पिछले दो सप्ताह में रूस में दूध की कीमतों में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है. कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि कई सारे मॉल और दुकानों में लोगों के सामानों की खरीददारी तक पर पाबंदी लगाई जा रही है.
रूस एक बड़ा इलेक्ट्रॉनिक मार्केट भी है, लेकिन प्रतिबंधों के कारण इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतें भी 17% तक बढ़ी हैं. इसी तरह लैपटॉप, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतें भी बढ़ी हैं. फोर्ब्स रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मॉस्को के कैफे में इस्तेमाल होने वाले कुछ सामानों की कीमत में तो 300% तक की बढ़ोतरी हुई है.
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन वाली सबसे बड़ी संस्था SWIFT से बाहर किए जाने के बाद रूस की इकोनॉमी घुटने पर आ गई है. इस वक्त एक डॉलर की तुलना में रूसी करेंसी 112 पर ट्रेड कर रही है.
इसी वजह से रिजर्व बैंक ऑफ रूस ने 7.65 लाख रुपये से ज्यादा पैसे की निकासी पर पाबंदी लगा दी है. यही वजह है कि रूस में बैंकों और ATM के आगे लोगों की लंबी कतार लगी है.
रूसी न्यूज पेपर इजवेस्टिया ने दावा किया है कि रूस में बिजनेस बंद करने वाली कंपनियों की संख्या बढ़कर 59 हो गई है. इनमें फॉक्सवैगन, एपल, माइक्रोसॉफ्ट, टोयोटा, मैकडॉनल्ड्स, गूगल पे, सेमसंग पे आदि शामिल हैं.
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