ईपीएफ की तरह NPS खाता क्यों नहीं खुलवाती सरकार? किस स्कीम में मिलता है कर्मचारियों को ज्यादा मुनाफा…

कई लोगों को पीएफ, ईपीएफ, पीपीएफ और एनपीएस को लेकर अक्सर गलतफहमियां हो जाती है. लोगों का सवाल होता है कि पीएफ की तरह एनपीएस का खाताभी सरकार क्यों नहीं खुलवाती है? रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने और बचत करने के लिए कई लोग ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि और एनपीएस यानी नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करते हैं.
भविष्य की निवेश योजनाओं को ईपीएफ और एनपीएस दोनों पूर्ति करते हैं. लेकिन, ईपीएफ में रिटायरमेंट के बाद पैसे का एक निश्चित रकम मिलने की गारंटी देती है, लेकिन एनपीएस में यह रकम मिल भी सकती और नहीं भी मिल सकती है.
ईपीएफ में आपके वेतन का एक हिस्सा हर महीने जमा होता है. वहीं, नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस (NPS) एक सरकारी रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है. सरकारी कर्मचारियों को एनपीएस में 10 प्रतिशत वेतन से और 14 प्रतिशत जमा कराना होता है. ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर फैडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे कहते हैं,
‘देखिए एनपीएस में रिटर्न है और पेंशन दोनों की गारंटी नहीं है. एनपीएस स्कीम साल 2005 से देश में सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू किया गया था. पुराने पेंशन स्कीम की जगह पर यह स्कीम आया था.
एनपीएस में कर्मचारियों के वेतन का 10 प्रतिशत कटता है औऱ 14 प्रतिशत कर्मचारी को खुद ही हर महीने जमा कराना होता है. इसके बाद भी रिटायरमेंट के बाद ये 24 प्रतिशत रकम कर्मचारी को मिल जाए इसकी कोई गारंटी नहीं है.
एनपीएस और ईपीएफ में अंतर –
दुबे आगे कहते हैं, ‘आप पूछेंगे कि ये पैसे क्यों नहीं मिलेंगे तो इसका जवाब है कि एनपीएस में जो पैसे हमलोग जमा करते हैं, वह मार्केट के हवाले है. तीन लोगों की कमिटी है, जो इन पैसों को शेयर बाजार में निवेश करने का फैसला लेती है. कर्मचारियों से भी पूछा जाता है कि ये पैसा आप कहां लगाना पसंद करेंगे.
कर्मचारी नौकरी करेगा कि वह शेयर बाजार में का हाल जानेगा. कर्मचारियों से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करा उसके हिस्से का 24 प्रतिशत की रकम शेयर मार्केट में लगा दिया जाता है. अगर आपके रिटायरमेंट के वक्त शेयर बाजार की स्थिति खराब हो गई तो इसकी कोई गारंटी नहीं कि आपका पैसा मिलेगा या डूब जाएगा या फिर बहुत कम मिलेगा.’
ईपीएफ औऱ पीपीएफ योजनाओं में अंतर –
गौरतलब है कि ईपीएफ और पीपीएफ (EPF and PPF) दोनों सरकार की बचत योजनाएं हैं. ईपीएफ को एक सरकारी संस्था द्वारा मैनेज किया जाता है, जिसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कहा जाता है,
जबकि पीपीएफ को सरकार सीधे मैनेज करती है. इन दोनों योजनाओं के अपने-अपने लाभ और कमियां भी हैं. EPFO द्वारा हर साल इकट्ठे किए गए पैसे का 15% इक्विटी में निवेश किया जाता है.
बाकी का निवेश सरकारी बॉन्ड में किया जाता है. ईपीएफ को एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड के नामों से भी जाना जाता है. यह संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सरकार द्वारा स्थापित बचत योजना है. यह वर्तमान में 8.10 % है.
सरकार द्वारा चलाई गई सेविंग स्कीम –
वहीं, पीपीएफ या पब्लिक प्रोविडेंट फंड सरकार द्वारा चलाई गई एक सेविंग स्कीम है. इस स्कीम में नियोजित कर्मचारी, खुद का व्यवसाय करने वाला, बेरोजगार या रिटायर्ड लोग भी निवेश कर सकता है.
इस स्कीम में न्यूनतम 500 रु. और अधिकतम 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष के लिए योगदान कर सकता है. इस पर एक निश्चित रिटर्न या लाभ मिलता है जो सरकार द्वारा हर तिमाही में तय किया जाता है. वर्तमान पीपीएफ ब्याज दर 7.1% है.
ईपीएफ में रिटायरमेंट की आयु 58 साल है. इस आयु के बाद आप अपना अधिकांश फंड निकाल सकते हैं. हालांकि, ईपीएफ फंड का एक हिस्सा जो कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के लिए उपयोग किया जाता है, आपको पेंशन के रूप में भुगतान किया जाएगा और टैक्स देना होगा. बशर्ते शेयर बाजार में आपका निवेश किया हुआ शेयर मुनाफा में हो.
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