
नई दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जिस अग्निपथ योजना की घोषणा की है, वह अब थल सेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती की मौजूदा प्रक्रिया की जगह लेगी.
रक्षा मंत्री ने इस योजना की घोषणा करते हुए इसे परिवर्तनकारी बताया है. सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि भर्ती की नई योजना ‘अग्निपथ’ के तहत सशस्त्र बलों में जो भर्ती की जाएगी,
उसे अगले चार सालों में 45000 से बढ़ाकर 59000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. सेना की सेवाओं के लिए भर्ती रैलियां 90 दिनों के भीतर शुरू होने की संभावना है.
अग्निपथ योजना के तहत पहले साल थल सेना में 40000 सैनिक, नौसेना में 3000 नाविक और वायुसेना में 3000 वायुसैनिक भर्ती किए जाएंगे. एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में जो योजना है,
उसके मुताबिक दूसरे साल में कुल 46500 भर्तियां की जाएंगी. जिसमें थल सेना और नौसेना में पहले साल की जितनी ही संख्या (40000, 3000) होगी, लेकिन वायुसेना में यह आंकड़ा बढ़कर 3500 होगा.
तीसरे साल में कुल 52400 लोगों को अग्निवीर के तौर पर नियुक्त किया जाएगा. जिसमें थलसेना में करीब 50000, नौसेना में 3000 और वायुसेना में 4400 युवाओं को नियुक्ति मिलेगी.
सशस्त्र बल की योजना चौथे साल में 58800 लोगों को भर्ती करने की है. जिसमें थल सेना में 50000, नौसेना में 3500 और वायुसेना में 5300 अग्निवीरों की भर्ती होगी.
पिछले दो सालों में नियुक्तियां नहीं होने की वजह से सशस्त्र बल में सैनिकों की जो कमी हो गई थी, इस बढ़ोतरी से उसकी भरपाई करने में मदद मिल सकेगी.
कौशल विकास मंत्रालय जारी करेगा विस्तृत प्रमाणपत्र
जानकारी के अनुसार तीनों सेवाओं में जो अग्निवीर या सैनिक इस योजना के जरिए नियुक्त होंगे, उनका एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस बनाया जाएगा. जिससे चार साल की अवधि में जो कौशल उन्होंने हासिल किया है,
उसका रिकॉर्ड रख सके और उनको ट्रैक किया जा सके. इसके अलावा सेनाएं अग्निवीरों के लिए कड़ी मूल्यांकन प्रणाली का मसौदा भी तैयार करेंगी जो उनके प्रदर्शन पर नजर बनाए रखने में मदद करेगा.
सूत्रों ने संकेत दिया है कि जब 4 साल बाद अग्निवीर सेवा से मुक्त होंगे तो कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय उनके कौशल को प्रमाणित करते हुए एक विस्तृत प्रमाणपत्र जारी करेगा.
कई राज्य और मंत्रालय अग्निवीरों को देंगे नौकरी में वरीयता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस योजना की घोषणा के दौरान कहा था कि विभिन्न राज्य और मंत्रालय यह सुनिश्चित करने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं कि जब अग्निवीर अपनी सेवा की अवधि पूरी कर लें
तो उन्हें नौकरी में वरीयता दी जाए. उन्होंने कहा था कि कुछ दिनों में ही सारी बातें साफ हो जाएंगी. इस घोषणा के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जो अग्निवीर अपने चार साल के कार्यकाल को पूरा करेंगे,
उन्हें पैरामिलेट्री फोर्स और असम राइफल्स में तरजीह दी जाएगी. एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक दूरदर्शी और स्वागत योग्य फैसला है.
जो देश के युवाओं के भविष्य को उज्ज्वल करेगा. गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और असम राइफल्स में भर्ती के लिए इस योजना के तहत 4 साल पूरे करने वाले अग्निवीरों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है.
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