सत्ता का चादर ओढ़ भाजपा नेता ढाबा में बेचता था अवैध शराब, पुलिस ने की कार्यवाही…

कांकेर। जिले में चल रहे ‘उजियारा’ अभियान ने इस बार ऐसा सच उजागर किया है, जिसने “सत्ता और सिस्टम” के रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईवे किनारे ढाबों पर की गई पुलिस कार्रवाई में अवैध शराब बिक्री का भंडाफोड़ हुआ, और मामला तब और दिलचस्प और सियासी हो गया जब इसमें एक भाजपा से जुड़े नेता जो समाज हित की बात करते नहीं थकता का नाम सामने आया है।
पुलिस की रेड कार्यवाही में कोमलपुर स्थित ढाबों से भारी मात्रा में अंग्रेजी और देशी शराब की जब्ती हुई, जहां खुलेआम ग्राहकों को बैठाकर “खास सेवा” दी जा रही थी। इस कार्रवाई में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष ईश्वर सिंह कावड़े व उसके भाई समेत 4 लोगों के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत् अपराध क्र. 116/2026, 117/2026, एवं अपराध क्रमांक 119/2026 धारा- 34(1)(ख),34(2),36(ए) आबकारी एक्ट पंजीबद्ध कर गिरफ्तार किया गया है।
अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या ये सिर्फ एक ढाबा था… या “सत्ता का छोटा सा ठेका”?
राजनीति बनाम कानून?
स्थानीय चर्चाओं में सामने आया कि आरोपी ईश्वर कावड़े का संबंध सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा से बताया जा रहा है। जहाँ इनको भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा का जिला अध्यक्ष बनाया गया है।वहीं इनकी पत्नी कांकेर जनपद में भाजपा समर्थित अध्यक्ष भी है। और आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी भी ठोकने की तैयारी में है। लोगों के बीच यह चर्चा जरूर है कि “अगर आम आदमी होता, तो क्या इतनी देर तक ये खेल चलता?”
जनता के बीच चर्चा:
लोग अब चुटकी लेते हुए कह रहे है
“ढाबा कम, मिनी बार ज्यादा था… और ऊपर से राजनीतिक कनेक्शन फ्री!”
कुछ लोगों का कहना है कि
“उजियारा अभियान ने अंधेरे में चल रहे धंधे पर रोशनी डाल दी, वरना ये ‘सेवा’ कब तक चलती, कोई नहीं जानता।”
भाजपा पर निशाना
विपक्षी दलों और आम लोगों के बीच यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि
“क्या सत्ता की छांव में ऐसे अवैध धंधे फल-फूल रहे हैं?”
हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष है और कानून सबके लिए बराबर है।
अंत में…
‘उजियारा’ अभियान ने एक बार फिर दिखा दिया कि अगर पुलिस चाहे, तो “ढाबे के अंधेरे में चल रहे अवैध कारोबार को भी एक्सपोज कर सकती है।
अब देखना होगा कि इस तरह के लोगों पर पार्टी क्या कार्यवाही करती है और इन्हें बाहर का रास्ता दिखाती है या फिर संरक्षण देती है। मामले में राजनीतिक जवाबदेही तय होती है या फिर मामला भी “एक और खबर” बनकर रह जाएगा।
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