
दुर्ग की सिटी कोतवाली पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने 41 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी के मामले में दो आरोपियों को गुजरात से गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को दिल्ली पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर एक महिला से फर्जी पूछताछ के बहाने बड़ी रकम ऐंठ चुके थे।
वीडियो कॉल से शुरू हुई ठगी, डर का माहौल बना कर ऐंठे पैसे
प्रार्थिया फरिहा अमीन कुरैशी, निवासी बघेरा, दुर्ग को 21 जनवरी 2025 को एक वीडियो कॉल आया जिसमें खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया गया। आरोपियों ने कहा कि संदीप कुमार नाम के अपराधी के पास 180 बैंक खातों की जानकारी है, जिसमें से एक खाता फरिहा के नाम पर है और उसमें ₹8.7 करोड़ जमा हैं।
उन्हें डराया गया कि यह मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग केस है और उन्हें तुरंत दिल्ली आकर बयान देना होगा, नहीं तो गिरफ्तारी हो जाएगी।
आरटीजीएस के जरिए ₹41 लाख की ठगी
डर के कारण फरिहा ने दिल्ली आने में असमर्थता जताई, जिसके बाद फर्जी अधिकारी ने ऑनलाइन बयान और संपत्ति का विवरण मांगते हुए भारतीय स्टेट बैंक से आरटीजीएस के जरिए कुल ₹41 लाख ट्रांसफर करवा लिए।
ठगी के पैसे को क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए विदेश भेजा गया
जांच में सामने आया कि यह पैसा गुजरात के मोरबी स्थित आस्था लॉजिस्टिक के खाते में गया, जिसे मनीष दोसी नामक आरोपी ऑपरेट कर रहा था। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि इस रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर दुबई भेजा गया, साथ ही स्थानीय अंगड़िया माध्यम से हवाला के जरिए भी पैसा ट्रांसफर किया गया।
पुलिस ने की गिरफ्तारी, बरामद हुए फोर्ड एंडेवर और कैश काउंटिंग मशीन
गुजरात से मनीष दोसी और असरफ खान को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर दुर्ग लाया गया। आरोपियों के पास से रुपए गिनने की मशीन और एक फोर्ड एंडेवर कार जब्त की गई है। आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 317(2), 317(4), 61(2)(A), और IT एक्ट की धारा 66(D) के तहत केस दर्ज किया गया है।
पुलिस टीम की सक्रियता से हुआ बड़ा खुलासा
इस कार्रवाई में निरीक्षक विजय कुमार यादव, सायबर सेल भिलाई, एसीसीयू टीम, राज कुमार चंद्रा और चित्रसेन साहू की अहम भूमिका रही।
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