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विश्व जल दिवस पर इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स व बीएसपी द्वारा प्रस्तुतीकरण एवं समूह परिचर्चा आयोजित

विश्व जल दिवस-2025 के अवसर पर द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के पर्यावरण प्रबंधन विभाग द्वारा 22 मार्च 2025 को एक दिवसीय तकनीकी प्रस्तुतीकरण एवं समूह परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आईआईपीई की छत्तीसगढ़ चैप्टर द्वारा भी सहभागिता दी गई।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वैज्ञानिक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर, प्रशांत कविश्वर ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित विषय “ग्लेशियर संरक्षण” पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि ग्लेशियर पृथ्वी पर मीठे पानी का सबसे बड़ा भंडार हैं और जलवायु संतुलन में इनकी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश में अपने अध्ययन का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ जैसे मैदानी क्षेत्र में रहकर भी कार्बन उत्सर्जन में कमी कर ग्लेशियर संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। “सतत जल प्रबंधन: समस्याएं एवं चुनौतियां” विषय पर आयोजित समूह परिचर्चा में अन्य गणमान्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

जिनमें विशेष रूप से विभागाध्यक्ष (भूगर्भ शास्त्र एवं जल प्रबंधन, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविध्यालय रायपुर), डॉ. निनाद बोधनकर, मुख्य महाप्रबंधक (पॉवर फेसिलिटी-बीएसपी), राजीव पाण्डेय, मुख्य महाप्रबंधक (सतर्कता-बीएसपी) सुनील सिंघल, मुख्य महाप्रबंधक (नगर सेवा एवं सीएसआर-बीएसपी) उत्पल दत्ता, महाप्रबंधक प्रभारी (पर्यावरण प्रबंधन विभाग-बीएसपी) श्रीमती उमा कटोच, महाप्रबंधक प्रभारी (जल प्रबंधन विभाग-बीएसपी) जे पी सिंह, महाप्रबंधक (पर्यावरण प्रबंधन-बीएसपी) के प्रवीण शामिल थे।

परिचर्चा की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष, भूगर्भ शास्त्र एवं जल प्रबंधन, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, डॉ. निनाद बोधनकर ने की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम जल संरक्षण पर विशेषज्ञों के बीच गंभीर विमर्श का मंच बना है और इससे प्राप्त ज्ञान और सुझावों से जल संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल संभव होगी।

विशेषज्ञ वक्ता के रूप में मुख्य महाप्रबंधक (पॉवर फेसिलिटी-बीएसपी), राजीव पाण्डेय ने कहा कि जल का विवेकपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आपदा के समय एक परिवार 2-3 बाल्टी पानी में काम चला सकता है, जबकि सामान्य स्थिति में वही परिवार 2-3 हजार लीटर पानी का उपयोग करता है।

उन्होंने ताप विद्युत संयंत्रों में जल उपयोग और इसमें आई तकनीकी प्रगति की जानकारी दी तथा मरोदा बांध में प्रस्तावित सौर ऊर्जा संयंत्र के जल संरक्षण में महत्व को रेखांकित किया। मुख्य महाप्रबंधक (सतर्कता-बीएसपी) सुनील सिंघल ने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र में इस्पात उत्पादन प्रक्रिया में जल का उपयोग मुख्यतः कूलिंग, डीस्केलिंग, कोक क्वेंचिंग एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण गतिविधियों में होता है।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण संयंत्र की प्राथमिकता है और इस दिशा में नवीनतम तकनीकों का समुचित उपयोग किया जा रहा है। वहीँ महाप्रबंधक प्रभारी (पर्यावरण प्रबंधन विभाग-बीएसपी) श्रीमती उमा कटोच ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं वर्तमान उपयोग दर को देखते हुए वर्ष 2050 तक जल की उपलब्धता आधी हो सकती है।

उन्होंने केप टाउन, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों के जल संकट के उदाहरण देते हुए सचेत किया कि यह भविष्य में सभी शहरों के लिए चेतावनी है। महाप्रबंधक प्रभारी (जल प्रबंधन विभाग-बीएसपी) जे पी सिंह ने कहा कि 1986-87 में सूखे के कारण भिलाई इस्पात संयंत्र लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था, किंतु इसके बाद जल संरक्षण हेतु कई ठोस कदम उठाए गए।

उन्होंने बताया कि आज सेल के सभी संयंत्रों में प्रति टन इस्पात उत्पादन में भिलाई की जल खपत सबसे कम है। उन्होंने बताया कि पूरे टाउनशिप का सीवेज ट्रीट कर इस्पात उत्पादन में उपयोग किया जा रहा है, जिससे स्वच्छ जल पर निर्भरता कम हुई है।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण मानसेवी सचिव, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा, बसंत साहू ने प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि ग्लेशियर संरक्षण मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य है और यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समूह परिचर्चा का संचालन महाप्रबंधक, पर्यावरण प्रबंधन विभाग, भिलाई इस्पात संयंत्र, के. प्रवीण ने किया, और जल विषयक प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया।

विश्व जल दिवस-2025 कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन पूर्व मानसेवी सचिव, डॉ. नागेन्द्र त्रिपाठी ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन सुश्री निधि शुक्ल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में पूर्व निदेशक, मेकॉन रांची, मिथिलेश देशमुख, अध्यक्ष, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा, पुनीत चौबे, अध्यक्ष, आईआईपीई छत्तीसगढ़ चैप्टर, ए. एन. सिंह, राज्य शासन एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारी, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा एवं आईआईपीई छत्तीसगढ़ चैप्टर के सदस्य तथा भिलाई-दुर्ग के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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