छत्तीसगढ़भिलाई

AI के जमाने में पिछले वित्तीय वर्ष के बजट को मंत्री जी ने 100 पन्ने में लिखने का कष्ट किया है -देवेन्द्र यादव…

भिलाई। भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने बजट प्रदेश के विकास की रूपरेखा होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ शासन के वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा सदन में पेश बजट में युवा, किसान और महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं है। जो कि बहुत ही निराशाजनक है।

प्रदेश के इतिहास का सबसे खराब बजट है। भाजपा की सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह करने और मुंगेरी लाल के सपने दिखाने वाला बजट पेश किया है। इसमें धरातल पर कुछ भी नहीं है। प्रदेश के किसान भाइयों, आदीवासी भाई.बहनों, युवा साथी और, महिलाओं के हित के लिए कुछ भी नहीं है। यह प्रदेश की जनता को गुमराह करने वाला बजट है।

प्रदेश सरकार सिर्फ अपनी नाकामी को छिपाने के लिए बड़ी.बड़ी बातें कर रही है और ड्रामेबाजी कर रही है। पूरे बजट को पढ़ने और विशलेषण करने के बाद कहीं भी गांव.गरीब, मजदूर, किसानों की आय बढाने के लिए कुछ भी योजना नहीं है। इस बजट से हर वर्ग को सिर्फ निराशा ही मिलेगी।

बेहतर भविष्य की कोई उम्मीद भी दूर तक नजर नहीं आ रही है। इस तरह के बजट से प्रदेश को अंधकार की ओर ले जाने की तैयारी है। इस बजट में नए कवर में पुराने पुस्तक को दिखाने की बात की गई है।पिछले  वर्ष एससीआर के लिए बात हुई थी। इस वर्ष भी एससीआर के लिए सिर्फ बातें ही की गई है।

बजट में पिछले वर्ष 5 करोड़का प्रावधान किया गया थ। इस वर्ष भी उतनी ही राशि रखी गई है। युवाओं की भर्ती के लिए कोई भी योजना नहीं है। जबकि उनकी सरकार की तात्कालीन शिक्षा मंत्री और सांसद मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के द्वारा घोषणा किए गए 30000 शिक्षक भर्ती का कहीं भी नामोनिशान नहीं है।

भूपेश बघेल जी ने भिलाई में नालंदा परिसर के लिए 20 करोड रुपए की घोषणा की थी भूमि पूजन कर कार्य शुरू करवाया था। पिछले साल साय सरकार ने सभी नगरीय निकायों में नालंदा परिसर की तर्ज पर लाइब्रेरी खोलने की बात की थी,लेकिन 1साल के बाद भी एक ईंट तक नहीं रखी गई है।

महिलाओं के लिए महतारी सदन निर्माण के लिए 50 करोड़ की घोषणा की गई थी इस वर्ष भी 50 करोड़ की घोषणा की गई है आखिर सरकार के पास वर्ष तक सिर्फ विकास को बजट पत्र में रखने की मंशा नजर आ रही है सन 2012 में मुख्यमंत्री रमन सिंह जी ने राजनांदगांव से रायपुर तक मेट्रो चलाने की बात की थी इस वर्ष दुर्ग से मेट्रो की शुरुआत के लिए 5 करोड रुपए का प्रावधान है। शब्दों के जाल में फंसा कर भविष्य की बात की जा रही है वर्तमान और मूलभूत जीवनशैली के लिए कोई भी योजना नहीं है।

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