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आर्य समाज सेक्टर 6 भिलाई में पितृ पक्ष पर विशेष सत्संग का आयोजन किया गया…

छत्तीसगढ़ प्रांतीय आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री अवनी भूषण पुरंग ने सभी अतिथियों का स्वागत सम्मान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा- जो सत्य को धारण कारण वह श्रद्धा है। जीवित माता-पिता की श्रद्धापूर्वक सेवा करना ही श्राद्ध कहलाता है। माता-पिता को अपने सत्कर्मों से तृप्ति करना ही तर्पण है। पांच महायज्ञ के नाम हैं – ब्रह्मयज्ञ , देवयज्ञ , पितृयज्ञ, बलिवैश्व देव यज्ञ, अतिथि यज्ञ।

श्रद्धा और तर्पण पितृ यज्ञ के अंग हैं। गीता की भाषा में स्वामी समर्पण आनंद ने लिखा है- संसार में दो तरह का कल का अभिमान है एक सच्चा और दूसरा झूठा। झूठ पूरा अभियान यह है कि मैं इस उच्च कुल में पैदा हुआ हूं इसलिए मैं श्रेष्ठ और उच्च हो गया। सच्चा खुला अभियान यह है कि मैं ब्राह्मणों के ब्रह्म जानने वालों वेदनिष्ठ, तपस्वी, कुल में पैदा हुआ हूं इसलिए मैं भी वर्चस्वी, तेजस्वी, तपस्वी और ज्ञानी बनूंगा।

श्रद्धापूर्वक मन में प्रतिष्ठा रखकर, विद्वान, अतिथि,माता-पिता, आचार्य आदि की सेवा करने का नाम श्राद्ध है. श्राद्ध जीवित माता-पिता, आचार्य , गुरु आदि पुरूषों का सम्मान करना है श्राद्ध है। पूज्य गुरुदेव स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी कहते थे कि हमारे आश्रम में चाय नहीं बनेगी यह नियम उनके गुरु के द्वारा बनाया गया था। इसलिए आज भी आश्रम में चाय नहीं बनती है।

जिस दिन चाय बन जाएगी उसे दिन गुरु जी की मृत्यु होगी। भी मानते थे कि कोई भी व्यक्ति परिवार में तब तक जीवित रहता है जब तक उसका मान सम्मान जीवित रहता है। बेटा, बेटी ,बहू जब माता-पिता और घर के बुजुर्गों की पूछ पारक करते हैं इस बात की चिंता करते हैं कि किस बात से उन्हें प्रसन्नता होगी और किस बात से उन्हें दुख होगा इस घर में बुजुर्ग लोग जीवित रहते हैं । आप कब तक जीवित रहते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण नहीं है।

कई लोग तो घरों में मरने से पहले मर जाते हैं। इसलिए जीवित रहने के लिए बच्चों को संस्कार दें। पूत सपूत क्यों धन संचय । पूत कपूत क्यों धन संचय। जिन घरों में संस्कार सद्भाव है उन घरों के बुजुर्ग वृद्ध आश्रम में नहीं रहते हैं।

कैलिफोर्निया से आए सदस्यों को सत्यार्थ प्रकाश भेंट किया

कैलिफोर्निया से आए हुए सौरभ एवं सौम्य को अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश देकर डॉ अजय आर्य ने एवं अवनी भूषण पुरंग तथा प्रवीण गुप्ता ने गायत्री मंत्र का स्कंध वस्त्र देकर सम्मानित किया । अजय गुप्ता सपाटनी को भी सत्यार्थ प्रकाश देकर आर्य समाज की सदस्यता दी गई।

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