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रायबरेली से जीत सकते हैं राहुल गांधी, कांग्रेस का कौन सा ‘हथियार’ काम आया…

Raebareli Lok Sabha Seat Exit Poll: कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) रायबरेली सीट से चुनाव जीत सकते हैं. एग्जिट पोल की मानें तो राहुल गांधी कांग्रेस की पारंपरिक सीट रायबरेली को न सिर्फ बचाने में कामयाब होंगे बल्कि अच्छे-खासे मार्जिन से चुनाव जीतने में सफल होंगे. बता दें कि बीजेपी ने रायबरेली में राहुल गांधी के मुकाबले दिनेश प्रताप सिंह को मैदान में उतारा है. उनकी भी क्षेत्र में अच्छी पकड़ है. इसके बावजूद एग्जिट पोल का अनुमान है कि यह सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी.

साल 2019 में कांग्रेस उत्तर प्रदेश की इकलौती सीट थी, जहां से कांग्रेस जीती थी. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) यहां से लगातार चौथी बार जीतकर सांसद बनी थीं. रायबरेली के अलावा यूपी की किसी और सीट पर कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था. राहुल गांधी खुद अमेठी की अपनी सीट हार गए थे. हालांकि वायनाड से जीतने में सफल रहे थे.

कांग्रेस का इमोशनल कार्ड काम आया

सोनिया गांधी 2024 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रही हैं. उन्होंने अपनी जगह बेटे राहुल गांधी को रायबरेली सीट से उतारने का फैसला किया. चुनाव प्रचार के दौरान सोनिया गांधी ने कहा कि वह अपने बेटे को रायबरेली की जनता को सौंप रही हैं. कांग्रेस का मानना है कि सोनिया गांधी की इमोशनल अपील काम आएगी और जीत मिलेगी. अब एग्जिट पोल में भी ऐसा ही अनुमान है.

अमेठी छोड़ रायबरेली गए तो हुआ विरोध

हालांकि 2024 के चुनाव से पहले कयास लगाया जा रहा था कि राहुल गांधी वायनाड के अलावा अपनी हारी हुई सीट अमेठी से ही भी चुनाव लड़ेंगे. लेकिन कांग्रेस ने उन्हें रायबरेली से उतरा तो एक वर्ग ने इसकी तिथि आलोचना भी की. बीजेपी ने भी राहुल गांधी को भगोड़ा करार दिया.

क्यों कांग्रेस का गढ़ है रायबरेली?

रायबरेली लोकसभा सीट पहले लोकसभा चुनाव से ही कांग्रेस का गढ़ रही है. 1951-52 में रायबरेली अलग सीट नहीं थी. तब रायबरेली और प्रतापगढ़ को मिलाकर एक सीट हुआ करती थी. पहले चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी यहां से चुनाव लड़े और सांसद बने. फिर 1957 जब रायबरेली अलग सीट बनी तब भी फिरोज गांधी ने इसी सीट से चुनाव लड़ा और जीतकर संसद पहुंचे. साल 196, 1971, 1977 और 1980 में इंदिरा गांधी लगातार चार बार यहां से सांसद बनीं.

कुल मिलाकर पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2019 में हुए आखिरी चुनाव तक कुल 16 बार कांग्रेस के उम्मीदवार इस सीट से जीत चुके हैं. सिर्फ तीन बार ऐसा मौका आया, जब कांग्रेस को सीट पर हार मिली.

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