छत्तीसगढ़दुर्ग

कामधेनु विश्वविद्यालय में दस आवासीय डेयरी फार्मिंग एवं वर्मी कंपोस्ट निर्माण का प्रशिक्षण संपन्न…

दुर्ग / दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के अंतर्गत लाइवलीहुड बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर, अंजोरा में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. (कर्नल) एन.पी. दक्षिणकर के मुख्य आतिथ्य, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.आर.के. सोनवाने की अध्यक्षता, निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ.जी.के. दत्ता, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ.संजय शाक्य के विशिष्ट आतिथ्य एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ.व्ही.एन.खूणे, प्रशिक्षण समन्वयक डॉ.क्रांति शर्मा की गरिमामय उपस्थिति में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति हब, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित क्षमता निर्माण कौशल विकास कार्यक्रम के तहत 2 फरवरी 2023 से 11 फरवरी 2023 तक डेयरी फार्मिंग एवं वर्मी-कंपोस्ट निर्माण विषय पर 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं प्रमाण पत्र वितरण संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में 30 प्रतिभागियों ने जिसमें 08 अनुसूचित जाति एवं 22 अनुसूचित जनजाति प्रशिक्षणार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

समापन अवसर पर कुलपति डॉ.(कर्नल)एन.पी.दक्षिणकर ने ऑनलाइन माध्यम से समस्त प्रतिभागियों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए उनके आर्थिक सामाजिक उन्नयन को अनवरत जारी रखने के लिए मार्गदर्शन दिया। कुलसचिव डॉ.आर.के.सोनवाने ने कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशिक्षणार्थी सही तकनीक का उपयोग कर सीखी हुई बातों को यदि अपनाई जाए तो वे अपने आर्थिक उन्नयन का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

अपने पशु को वैज्ञानिक तरीको से कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार कर दुग्ध उत्पादन को बढ़ाकर आर्थिक लाभ प्राप्ति के साथ ही घुरवा एवं गोबर का उपयोग कर केंचुआ खाद का उत्पादन भी कर सकते हैं। निदेशक अनुसंधान सेवाऐं डॉ.जी. के.दत्ता ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि मृदा में जैविक तत्वों की कमी के कारण मृदा की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है। महिलाएं समूह के माध्यम से अच्छा काम कर रही हैं।

इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण पर जोर दिया जाए तथा स्व सहायता समूह के माध्यम से डेयरी फार्मिंग एवं वर्मी कंपोस्ट बनाने की शुरुआत करें। निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. संजय शाक्य ने कहा कि एल.बी.आई. योजना के माध्यम से नि:शुल्क प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में 08 अनुसूचित जाति एवं 22 अनुसूचित जनजाति प्रशिक्षणार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। शासन की मंशानुरूप प्रदेश में गोपालन, केंचुआ खाद पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

गोपालन में दुग्ध क्षमता कम होने के कारण उनको उपयोगी बनाने के लिए गोबर खाद एवं केंचुआ खाद बनाना आवश्यक है। फसल अवशेषों को जलाने की अपेक्षा उसको पशुओं को खिलाने एवं खाद बनाने हेतु उपयोग में लाना आवश्यक है। भूमि सुधार हेतु उसमें जैविक खाद का उपयोग जरूरी है। मानव स्वास्थ्य के लिए मृदा स्वास्थ्य आवश्यक है। समापन कार्यक्रम का संचालन कर रही डॉ. क्रांति शर्मा ने कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रशिक्षणार्थी अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकते हैं। डॉ. राकेश मिश्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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