अन्‍य

जहां बर्फ में समा गए 29 लोग; देखें वहां का दिल दहला देने वाला ये घटना…

उत्तरकाशी. डोकरानी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में हुए हादसे के बाद चल रहा सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन 9 दिन बाद भी पूरा नहीं हो पाया है. इस बीच द्रौपदी के डंडा में क्रेवास का वीडियो और वहां की तस्वीरें सामने आई हैं जहां पर्वतारोही दल के सभी 29 लोग बर्फ में समा गए थे. इनमें साफ-साफ देखा जा सकता है कि बड़े क्रेवास में दब जाने के कारण यह बड़ा हादसा हुआ जिसमें कई जिंदगियां समा गईं.

हादसे के बाद रेस्क्यू के लिए पहुची SDRF के एक जवान ने तस्वीरें ली हैं और वीडियो बनाया है. घटना के 90 दिन बाद भी दो लापता ट्रेनी का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है. सूत्र बताते हैं कि एक शव, जिसको रेस्क्यू किया गया था वह भी भारी बर्फबारी होने के कारण बर्फ में दब गया. इस कारण फिर से रेस्क्यू करना चुनौती बनी हुई है.

बड़ा अपडेट यह है कि आईटीबीपी, एसडीआरएफ की टीमें वापस लौट आयी हैं. सूत्र बताते हैं कि हादसे वाली जगह एवलॉन्च नहीं आया था. सभी पर्वतारोहियों के पैदल चलते समय बर्फ में दब जाने के कारण मौत होना बताया जा रहा है. हालांकि, यह अभी भी जांच का विषय है कि आखिर इतना बड़ा हादसा किस वजह से हुआ है. वहीं, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान यानी निम के प्रिंसिपल से लेकर जवाबदेह अधिकारी 9 दिन बाद भी मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं.

परिजन निम को ठहरा रहे जिम्मेदार

द्रौपदी का डांडा एवलॉन्च की चपेट में आने से मृत 29 पर्वतारोहियों के परिजनों ने घटना के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान को जिम्मेदार ठहराया है. परिजनों ने निम के समक्ष कड़ा आक्रोश जताया है. परिजनों का कहना है कि जब केदारनाथ सहित कई स्थानों पर एवलॉन्च आने की जानकारी थी और इसके साथ ही भूकंप जैसी मामूली गड़बड़ी भी बड़े पैमाने पर आपदाएं पैदा कर सकती हैं. इन सब की जानकारी होने के बाद भी अभियान को रोका क्यों नहीं गया?

संपूर्ण खबरों के लिए क्लिक करे

https://jantakikalam.com

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button