क्वाड को लेकर चीन की आपत्ति पर जयशंकर की दो टूक, कहा- ये सामूहिक प्रयासों का विरोध

बैंकॉकः विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन की आपत्ति के परोक्ष संदर्भ में कहा कि क्वाड (QUAD) से पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को फायदा होगा और 4 देशों के समूह की गतिविधियों को लेकर किसी भी तरह की आपत्ति एक तरह से सामूहिक और सहयोगात्मक प्रयासों का एकतरफा विरोध है.
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक रुख का मुकाबला करने के लिए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर क्वाड या चार पक्षीय सुरक्षा वार्ता की शुरुआत की थी.
जयशंकर ने यहां चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय में ‘हिंद-प्रशांत पर भारत का दृष्टिकोण’ विषय पर अपने संबोधन में कहा कि क्वाड सबसे प्रमुख बहुपक्षीय मंच है जो हिंद-प्रशांत में समकालीन चुनौतियों का समाधान करता है.
हाल के वर्षों में इसकी शीर्ष स्तर पर बैठक हुई है. हमने कुछ महीने पहले टोक्यो में एक शिखर सम्मेलन किया था और यह इस बात का संकेत है कि इसका काम कितना महत्वपूर्ण हो गया है. जयशंकर ने कहा कि क्वाड की ऊर्जा, गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला में निर्देशित हैं.
वे समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत, साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष सहयोग के लिए कनेक्टिविटी को लेकर हैं.
सार्वजनिक वस्तुओं की आपूर्ति में क्वाड की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है
विदेश मंत्री ने कहा, ‘सार्वजनिक वस्तुओं की आपूर्ति में क्वाड की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है. हमें विश्वास है कि संपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र इसकी गतिविधियों से लाभान्वित होगा.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इसके बढ़ते महत्व को मान्यता दी है जयशंकर ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा, यदि कहीं कोई आपत्ति है, तो ये दूसरों की पसंद पर वीटो का प्रयोग करने की इच्छा से उत्पन्न होती हैं…और एक तरह से सामूहिक और सहयोगात्मक प्रयासों का एकतरफा विरोध है.’
चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के नेतृत्व वाले क्वाड समूह का कई बार विरोध किया है. चीन ने कहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्वतंत्रता और खुलेपन के नाम पर अमेरिका ने गुटबाजी के लिए यह रणनीति बनाई है.
चीन का दावा है कि समूह चीन के आसपास के माहौल को बदलने का इरादा रखता है. इसका उद्देश्य चीन को नियंत्रित करना और एशिया.प्रशांत देशों को अमेरिकी आधिपत्य के तहत कठपुतली के रूप में काम कराना है.
‘हिंद-प्रशांत’ अफ्रीका के पूर्वी तटों से लेकर अमेरिका के पश्चिमी तटों तक
भारत, अमेरिका और कई अन्य वैश्विक शक्तियां संसाधन संपन्न क्षेत्र में चीन के बढ़ती सैन्य आक्रामकता के मद्देनजर स्वतंत्र, खुले और संपन्न हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण को सुनिश्चित करने पर जोर दे रही हैं.
हिंद-प्रशांत, इसके विकास और इसके अवसरों को भारत कैसे देखता है, इस बारे में जयशंकर ने कहा, ‘हम हिंद-प्रशांत को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में देखते हैं जो अफ्रीका के पूर्वी तटों से लेकर अमेरिका के पश्चिमी तटों तक फैला हुआ है.’
विदेश मंत्री ने कहा यह तेजी से सुगम स्थान बन रहा है जो वैश्विक आबादी के 64 प्रतिशत से अधिक का घर है और जो दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 60 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है.
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार का लगभग आधा हिस्सा इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार मार्गों से होता है. उन्होंने कहा कि आगे और तालमेल से क्षेत्र विकसित होगा और समृद्धि होगी.
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