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पशु आहार पर 5% जीएसटी को लेकर भ्रम की स्थिति, सरकार के स्पष्टीकरण से गफलत बढ़ी…

पशु आहार के रूप में इस्तेमाल होने वाले दाल मिलों के बाय प्रोडक्ट जैसे चूरी, छिलका, खंडा आदि के बारे में एक स्पष्टीकरण जारी किया गया है। इसमें इन वस्तुओं पर 5% जीएसटी लगाना तय हुआ है। सरकार का मानना है कि चूरी, छिलका, खंडा सीधे रूप में पशु आहार नहीं हैं। पशु आहार पहले भी कर मुक्त था और रहेगा।

लेकिन, अब पशु आहार बनाने के लिए उपयोग में आने वाली चूरी को कर के दायरे में रखा गया है। मतलब यह हुआ कि दाल मिलें अब जिसे भी यह बाय प्रोडक्ट बेचेंगी, उनसे 5% की दर से टैक्स वसूला जाएगा। इस कारण पशु आहार के टैक्स स्लैब की स्थिति साफ होने के बजाय इसमें पेचीदगी बढ़ गई है।

शासन द्वारा जारी स्पष्टीकरण में यही लिखा गया है कि दाल मिल से जो बाय प्रोडक्ट्स निकलते हैं, वे सीधे पशु आहार के रूप में उपयोग में नहीं लिए जाते, बल्कि पशु आहार के निर्माण में लगने वाली एक सामग्री के रूप में उपयोग किए जाते हैं। इसलिए उन पर करमुक्ति के प्रावधान लागू नहीं होंगे और यह 5% की दर से करयोग्य होगा।

दाल मिलों से तीन प्रकार के बाय प्रोडक्ट निकलते हैं

दरअसल, दाल मिलों से तीन प्रकार के बाय प्रोडक्टस निकलते हैं। पहला होता है छिल्का जो कि नोटिफिकेशन नंबर 2/2017 की इंट्री नंबर 102 के अंतर्गत करमुक्त है। दूसरा खंडा यानी कि प्रोसेसिंग के दौरान टूटी हुई दाल जिसका 25 किलो से ज्यादा का पैकेट बंद विक्रय करमुक्त है।

तीसरा होता है चूरी जोकि खंडा और छिलका का मिश्रण होता है, इसे अलग नहीं किया जा सकता। इस चूरी को लेकर अब तक सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। जबकि यह सभी बाय प्रोडक्ट कमर्शियल टैक्स एक्ट, वेट एक्ट तथा जीएसटी एक्ट के अंतर्गत पिछले 20-25 वर्षों से करमुक्त की श्रेणी में ही रहे हैं।

चूरी सीधे पशु आहार है या नहीं

वरिष्ठ कर सलाहकार आर. एस. गोयल के अनुसार समस्या उत्पन्न हो रही है, क्योंकि चूरी सीधे ट्रेडर्स के माध्यम से पशु आहार के रूप में बेची जाती रही है। गोशाला में इसे पशु आहार के रूप में खिलाया जाता रहा है,

लेकिन सर्कुलर में इसे पशु आहार नहीं माना है। राहत की बात यह है कि इन बाय प्रोडक्ट्स को 3 अगस्त 2022से कर योग्य माना जाएगा, 1 जुलाई 2017 से नहीं। अब, जो गोशाला वाले इसे पशु आहार के रूप में सीधे मिलों से खरीद रहे थे, उन्हें कर चुकाना होगा।

यह है एकमात्र उपाय

मिल मालिक यदि इस बाय प्रोडक्ट पर टैक्स भरने से बचना चाहते हैं तो वे इसमें कुछ और सामग्री जोड़कर उसे पशु आहार की सरकारी परिभाषा में लाकर बेच सकते हैं,

जो करमुक्त है। मिल व्यापारियों को उन्हें शासकीय मानकों के अनुसार इन बाय प्रोडक्ट्स में अब शुद्धता एवं न्यूट्रीशन वैल्यू के लिए नमक, कैल्शियम, प्रोटीन आदि डालकर, फरदर प्रोसेसिंग करते हुए निर्मित होने वाले ‘पशु आहार’ के रूप में बेचना होगा, तभी उन्हें कर से मुक्ति मिलेगी।

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