
पटना / बिहार में जनता दल युनाइटेड ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन खत्म कर दिया। भाजपा के साथ अलग होने के बाद भाजपा को ना सिर्फ बिहार में बड़ा झटका लगा है बल्कि राज्यसभा में एनडीए का गणित भी बिगड़ सकता है। दरअसल राज्यसभा में जदयू के पांच सांसद हैं, साथ ही राज्यसभा में जदयू के हरिवंश डिप्टी चेयरमैन हैं। राज्यसभा जदयू के साथ के बाद भी एनडीए के पास बहुमत नहीं था, लेकिन जदयू के बाहर होने के बाद एनडीए का आंकड़ा सदन में कम हो गया है।

तीन साल में तीन बड़े साथी गए
पिछले तीन साल में एनडीए को एक के बाद एक बड़े समर्थक दल छोड़कर चले गए हैं। जदयू से पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और पंजाब में शिरोमणी अकाली दल ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था। वहीं 2019 के चुनाव से पहले ही तेलगु देशम पार्टी ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था। अब जब जदयू एनडीए का हिस्सा नहीं है, लिहाजा भाजपा के पास अब राज्यसभा में बड़े दल के तौर पर ओडिशा से बीजू जनता दल, आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का ही साथ बचा है।

राज्यसभा गणित
राज्यसभा में कुल 237 सीटें हैं जिसमे से 8 सीटें अभी खाली हैं। चार सीटें जम्मू कश्मीर, एक त्रिपुरा, तीन नामित सदस्यों की सीटें खाली हैं। राज्यसभा में बहुमत के लिए कुल 119 सांसदों की जरूरत होती है। फिलहाल एनडीए की बात करें तो उसके पास 115 का आंकड़ा साथ है, जिसमे 5 नामित और एक निर्दलीय सांसद हैं। जदयू के एनडीए से अलग होने के बाद अब उसके पास सिर्फ 110 सीटें बचेंगी, जोकि बहुमत के आंकड़े से 9 सीट कम है।

बीजेडी-YSRCP अहम
सरकार तीन सांसदों को नामित कर सकती है। उन्हें शीतकाल सत्र से पहले नामित कर सकती है। इसके साथ ही भाजपा को भरोसा है कि त्रिपुरा से सीट जीत सकती है। इसके बाद भी एनडीए के पास 114 का ही आंकड़ा पहुंचता है। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा अब 121 हो जाएगा। भाजपा को बीजेडी और वाईएसआरसीपी का साथ चाहिए होगा। दोनों दलों के पास 9-9 सांसद हैं। ऐसे में अहम बिलों को पास कराने में इन दोनों दलों की भाजपा को समर्थन की जरूरत होगी।

कुल सीटें
हाल ही में हुए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को बीजेडी, वाईएसआरसीपी, टीडीपी, अकाली दल, बसपा का साथ मिला था। राज्यसभा में फिलहाल भाजपा के पास 91 सांसद, एआईएडीएमके के पास 4, एसडीएफ के पास 1, आरपीआईए के पास 1, एजीपी के पास 1, पीएमके के पास 1, एमडीएमके के पास 1, तमिल मनिला के पास 1, एनपीपी के पास 1, एनएनएफ के पास 1, यूपीपीएल के पास 1, आईएनडी के पास 1, नामित 5 हैं। यह कुल आंकड़ा 110 तक पहुंचता है।
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