आपदा को चीन ने बनाया अवसर, मात्र इतने डॉलर में रूस से खरीद रहा तेल

बीजिंग : यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के परिणामस्वरूप कई पश्चिमी देशों ने तेल की खरीद के मामले में रूस के साथ अपना व्यापार बंद कर दिया है। अमेरिका और पश्चिमी देश मिलकर रूस के साथ तेल और गैस के आय़ात को पूरी तरह रोकना चाहते हैं ताकि रूसी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ी जा सके।
इससे रूसी अर्थव्यवस्था को एक झटका लगा है। हालांकि व्लादिमीर पुतिन ने इसकी काट ढूंढने में लगे हैं और अपने कच्चे तेल को चीन को बेचकर स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हैं।
लगातार गैस और तेल खरीद रहा चीन
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण पैदा हुआ संकट का सीधा फायदा अब चीन उठाने लगा है। चीन ने धीरे-धीरे रूस से गैस और तेल का आयात बढ़ा दिया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने रूस से तेल, गैस और कोयले की खरीद में 75 प्रतिशत की बढोतरी की है। पिछले एक साल के मुकाबले चीन ने 80 प्रतिशत से ज्यादा नेचुरल गैस खरीदा है। घरेलू स्तर पर मांग कम होने के बावजूद चीन लगातार रूस से गैस और तेल खरीद रहा है।
बड़ी चीनी कंपनियां कर रही खरीदारी
कोरोना और लॉकडाउन की वजह से पहले ही चीन में तेल की मांग काफी कम है, इसके बावजूद चीन अब इसे स्टॉक करने में लगा हुआ है। चीन को पता है कि इस समय रूस से वो काफी फायदा उठा सकता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन का तेल आयात लगभग 1.1 मिलियन बैरल प्रति दिन तक जा सकता है। जबकि यह पहली तिमाही में साढ़े सात लाख बैरल प्रतिदिन था।
रिपोर्ट के मुताबिक यह खरीदारी एशिया के शीर्ष रिफाइनर सिनोपेक कॉर्प की व्यापारिक शाखा यूनिपेक और चीन के रक्षा समूह नोरिन्को की एक इकाई जेनहुआ ऑयल द्वारा की जा रही है।
रूस के लिए भी राहत की बात
शिपिंग डेटा के मुताबिक चीन में रूसी तेल के मुख्य शिपर के रूप में लिवना शिपिंग लिमिटेड को भी बताया गया है। यह रूस के लिए राहत की बात कही जा सकती है
क्योंकि विटोल और ट्रैफिगुरा जैसे सबसे बड़े कमोडिटी व्यापारियों ने रूसी उत्पादकों से तेल खरीदना बंद कर दिया था। एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया
कि विटोल और ट्रैफिगुरा के बाहर निकलने के बाद इस क्षेत्र में भारी शून्य पैदा हो गया। इसे केवल उन कंपनियों द्वारा भरा जा सकता था जो मूल्य प्रदान कर सके और जिन पर रूसी समकक्ष भरोसा करे।
29 डॉलर प्रति बैरल की दर से तेल बेच रहा रूस
इन चीनी कंपनियों ने इसका खूब फायदा उठाया। रूस की खराब स्थिति के कारण इन चीनी कंपनियों ने रूस से मात्र 29 डॉलर प्रति बैरल में तेल की खरीदारी की है।
आपको बता दें कि चीन-रूस के बीच जब युद्ध शुरू हो गया था तो तेल के दाम 140 डॉलर प्रति बैरल को छू गए थे। वहीं अब मात्र 29 डॉलर प्रति बैरल की दर से चीन को रूस से तेल मिलना बेहद चौकाने वाला है।
इससे साबित होता है कि यह युद्ध चीन के लिए फायदे का सौदा बन चुका है। कोरोना से बेहद बुरी तरह प्रभावित चीनी अर्थव्यवस्था को इस सस्ते तेल की खरीदारी से राहत मिलने की उम्मीद है।
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