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इन्फ्रास्ट्रक्टर, ऊर्जा प्रोजेक्ट और चीन के खिलाफ कूटनीति, बौद्धस्थल से आज नेपाल के साथ नये रिश्ते की शुरूआत…जाने क्या रहेगा खास 

काठमांडू : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज नेपाल के यात्रा पर जाएंगे और साल 2019 में दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार पीएम मोदी का नेपाल दौरा होने वाला है।

इस दौरान पीए मोदी नेपाल के साथ साझा संस्कृति और सभ्यतागत विरासत, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और शिक्षा के स्तंभों पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

पीएम मोदी का नेपाल दौरा

अपने नेपाल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से लुंबिनी में मुलाकात करेंगे, जहां पर राजकुमार सिद्धार्थ का जन्म हुआ था, जो बाद में बिहार के बोधगया में आकर गौतम बुद्ध बन गये थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से हेलीकॉप्टर के द्वारा लुंबिनी तक पहुंचेगे। कुशीनगर वो जगह है, जहां पर गौतम बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। पीएम मोदी शुभ बुद्ध पूर्णिमा दिवस पर ऐतिहासिक लुंबिनी विरासत स्थल का भी दौरा करेंगे,

जिनका इस दुनिया में करीब 50 करोड़ लोग अनुयायी हैं। लुंबिनी दौरे के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा लुंबिनी में बौद्ध केन्द्र का उद्घाटन करेंगे, जिसे भारत ने बनवाया है।

हिंदू-बौद्ध विरासत पर ध्यान

पीएम मोदी की यात्रा का मुख्या उद्येश्य दोनों पड़ोसी देशों के बीच उनकी साझा हिंदू और बौद्ध विरासत पर ध्यान केंद्रित करके सांस्कृतिक संबंध को गहरा करना है।

भारतीय पीएम पहले ही नेपाल की अपनी पिछली यात्राओं में जनकपुर में सीता देवी मंदिर और मुक्तिनाथ के प्रसिद्ध विष्णु मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। सांस्कृतिक संबंधों से अलग, दोनों देशों के बीच भारत के काठमांडू के बीच कनेक्टिविटी के और विकल्प बनाने के लिए हवाई गलियारे बनाने की बात हो सकती है।

इसके साथ ही, नेपाल में शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए भी दोनों देशों के बीच समझौते किए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी नेपाल में एक टेक्निकल कॉलेज खोलने की घोषणा कर सकते हैं। इसके साथ ही पीएम मोदी आज नेपाल में एक सैटेलाइट केन्द्र की स्थापना करने की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं।

भारत-नेपाल समझौते

पिछले महीने नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा ने नई दिल्ली की यात्रा की थी और इस दौरान ऊर्जा सहयोग बढ़ाने को लेकर दोनों देशों ने विजन डॉक्यूमेंट जारी किया था। लिहाजा पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीचहाइड्रो-इलेक्ट्रिक सहयोग पर समझौता हो सकता है।

भारत न केवल नेपाल में पनबिजली इकाइयों में निवेश और निर्माण करना करना चाहता है, बल्कि सीमा पार बिक्री के लिए बिजली निकालने के लिए पारेषण लाइनों का निर्माण भी करना चाहता है। इससे न केवल नेपाल में बुनियादी ढांचे का विकास होगा, बल्कि काठमांडू के खजाने में पैसा भी आएगा।

चीन को काउंटर करने की तैयारी

नेपाल के लोगों का भी मानना है कि, पीएम मोदी का नेपाल दौरे नेपाल के विकास के लिए काफी अहम होने वाला है, वहीं, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकार भी चाहते हैं, कि काठमांडू बिजली और सड़क बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में हिमालयी गणराज्य में चीनी घुसपैठ पर नई दिल्ली की चिंता को समझे।

उदाहरण के लिए, लुंबिनी के पास भैरहवा में गौतम बुद्ध अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को एक चीनी कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और काठमांडू के बाद दूसरा एयरपोर्ट है, जिसे चीनी कंपनी ने विकसित किया है।

सोनौली में भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा से 10 किमी से भी कम दूरी पर स्थित इस हवाई अड्डे का उद्घाटन भी देउबा द्वारा 16 मई को किया जाएगा, जिसके बाद वह भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने के लिए लुंबिनी पहुंचेंगे।

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