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कौन हैं राजीव कुमार, जो 15 मई से संभालेंगे नए मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यभार

नई दिल्ली / राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को देश का नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया है। ये 15 मई से मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा की जगह लेंगे,

जिनका कार्यकाल 14 मई को खत्म हो रहा है। केंद्र सरकार ने आज इसकी जानकारी दी है। जानिए राजीव कुमार कौन हैं और इससे पहले वह किन-किन पदों पर रह चुके हैं।

वैसे वे करीब पिछले डेढ़ वर्षों से चुनाव आयुक्त के तौर पर भारतीय निर्वाचन आयोग में जिम्मेदारियां संभल रहे हैं। लेकिन, उससे पहले उनका भारत सरकार से लेकर राज्य सरकार तक में बहुत लंबा कार्यकाल रहा है।

अभी सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त हैं राजीव कुमार

राजीव कुमार इस समय भारतीय निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त के बाद सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त हैं। इस पद का जिम्मा उन्होंने 1 सितंबर, 2020 से संभाला हुआ है।

चुनाव आयोग में आने से पहले कुमार पब्लिक एंटरप्राइजेज सेलेक्शन बोर्ड के चेयरमैन थे। इस पद पर उनकी नियुक्ति 2020 के अप्रैल में ही उनके भारतीय प्रशासनिक सेवा से रिटायर्मेंट के बाद हुई थी।

राजीव कुमार बिहार/झारखंड कैडर के 1984 बैच के रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर हैं, जो 2020 के फरवरी में सेवानिवृत्त हुए थे।

काले धन पर ऐक्शन के लिए नाम

19 फरवरी, 1960 को जन्मे राजीव कुमार ने बीएससी, एलएलबी, पीजीडीएम और पब्लिक पॉलिसी में एमए किया हुआ है और उनके पास ऑल इंडिया सर्विस में कार्य करने का 36 साल का अनुभव है। वह केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सेवाएं दे चुके हैं।

भारत सरकार के वित्त सचिव और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के सचिव के तौर पर इन्होंने बैंकिंग, बीमा और पेंशन रिफॉर्म में योगदान दिया है। काले धन पर प्रहार करते हुए इन्होंने ~3.38 शेल कंपनियों के बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए थे।

आईएएस के तौर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं

राजीव कुमार रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड, एसबीआई और नाबार्ड में डायरेक्टर भी रह चुके हैं और इकोनॉमिक इंटेलिजेंस काउंसिल, फाइनेंशियल स्टैबिलिटी एंड डेवलपमेंट काउंसिल,

बैंक बोर्ड ब्यूरो, फाइनेंशियल सेक्टर रेगुलेटरी अप्वाइंटमेंट सर्च कमिटी, सिविल सर्विसेज बोर्ड के अलावा कई ऐसे बोर्ड और कमिटियों में भी बतौर सदस्य योगदान दे चुके हैं।

नीति आयोग में भी अहम योगदान

राजीव कुमार की एक चर्चा नीति आयोग पुनर्गठित करने के लिए भी की जाती है, जिसके लिए बनी टास्क फोर्स के भी ये एक सदस्य थे। उसी टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर नीति आयोग के मौजूदा ढांचे को मंजूरी दी गई थी।

केंद्र सरकार की ड्यूटी से पहले फिल्ड में कार्यरत रहते हुए ये बिहार में प्राथमिक शिक्षा, उद्योग विभाग के डायरेक्टर रह चुके हैं।

वहीं राज्य में कई जिलों के जिलाधिकारी, जिला विकास अधिकारी, एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) भी रह चुके हैं। उन्होंने आईएएस के तौर पर सेवा की शुरुआत एसडीएम के तौर पर की थी।

पर्वतारोहण में भी है बहुत दिलचस्पी

राजीव कुमार के बारे में कहा जाता है कि उन्हें अपनी सरकारी जिम्मेदारी के बाद का वक्त परिवार के साथ गुजारना काफी पसंद है। इनकी दो बेटियां हैं, जिनके साथ इनका पिता के साथ-साथ एक दोस्त की तरह का भी नाता है।

कुमार एक बहुत ही उत्कृष्ट ट्रेकर भी हैं और लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम और तिब्बत में हिमालय के कई दर्रे पार कर चुके हैं।

वहीं, सहयाद्रि, पश्चिमी घाट और पालघाट जैसी ऊंचाइयों पर भी इन्होंने ट्रेकिंग का आनंद लिया हुआ है। राजीव कुमार को भारतीय शास्त्रीय संगीत और भक्ति संगीत पसंद है। मेडिटेशन में भी इनकी गहरी रुचि रही है।

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