रूस और यूक्रेन की लड़ाई से भारत सरकार ने ली ये सीख, अब हथियारों को लेकर उठाया ये महत्वपूर्ण कदम

यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध ने दुनिया को कई संदेश दिए हैं इन संदेशों में एक संदेश स्वदेशी हथियारों के प्रयोग को बढ़ावा देने का भी है हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत यह प्रयास काफी समय से चल रहा है।
लेकिन अब इस काम में तेजी दिख रही है जानकारों का मानना है कि विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता के कारण किसी भी देश की कूटनीतिक विकल्प सीमित हो जाती है।
इसलिए भी भारत ने रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और इस काम में और अधिक तेजी लाने का फैसला किया है। रक्षा उपकरणों के स्वदेशी प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने
‘बाय ग्लोबल’ सिद्धांत के उलट स्वदेशी रक्षा उपकरणों के प्रयोग को बढ़ावा देने का फैसला किया है इस फैसले के तहत भारत सरकार ने थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों में ही अधिक से अधिक
स्वदेशी रक्षा उपकरणों के उत्पादन और प्रयोग का फैसला लिया है। मिली जानकारी के अनुसार 2020 से मार्च 2022 तक थल सेना के कुल 29 रक्षा सौदे किए गए जिसमें से 19 भारतीय कंपनियों के साथ किए गए।
इसके साथ ही साथ जानकारी यह भी आ रही है कि 2022-23 में सेना करीब 26000 करोड़ों रुपए की खरीदारी करेगा, जिसमें से 196 हजार करोड़ रक्षा उपकरणों की खरीदारी भारतीय कंपनियों से की जाएगी।
इसके साथ ही साथ वायु सेना में भी स्वदेशी और भारत में निर्मित रक्षा उपकरणों के खरीदी और प्रयोग को अधिक बढ़ावा देने का फैसला किया गया है इसके तहत लड़ाकू विमानों के मामले में एलसीएच मार्क वन,
एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट – एम्का , स्वदेशी यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, ब्रह्मोस, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अकाश, रोहिणी, एसआरई, पी ए आर जैसे स्वदेशी रडार सिस्टम को वायु सेना में अपनाने और
इसका प्रयोग बढ़ाने का सरकार ने फैसला किया है। नौसेना हालांकि 95 फ़ीसदी तक स्वदेशी हो चुकी है नौसेना ने सभी 37 प्रस्तावित पनडुब्बियों को भारत में ही विकसित और
निर्माण करने काल निर्णय लिया है इसके साथ ही साथ 43 युद्ध पोतों और 111 यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों का निर्माण भी भारत में ही कराया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने शुरू की यह पहल
रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र सरकार ने रक्षा बजट का पूरा कैपिटल आवंटन भारत में ही खर्च करने का फैसला किया है इसके साथ ही साथ सरकार ने रक्षा मामलों में विदेशी कंपनियों के भारत में निवेश और
उनके भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी को लेकर लेवल प्लेयिंग फील्ड की व्यवस्था करने का फैसला किया है। इसके साथ ही साथ भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों के साझेदारी से बने
रक्षा उपकरणों के निर्यात को लेकर के भी सरकार ने नियमों को लचीला बनाने का भी निर्णय लिया है। रक्षा उत्पादों के टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के लिए एक इंडिपेंडेंट बॉडी होने का फैसला भी लिया गया है।
जानकारों का मानना है कि सेना में रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण से भारत की सैनिक ताकत के साथ साथ कूटनीतिक शक्ति भी बढ़ेगी। साथ ही साथ भविष्य में किसी भी संकट की स्थिति में भारत किसी पर निर्भर नहीं बल्कि आत्मनिर्भर रहेगा।
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