
गया में अतरी पुलिस के थानाध्यक्ष के एक से बढ़ कर एक कारनामे हैं। वह दोषी को पकड़ने की तलाश में निकलती तो है पर जब दोषी हाथ नहीं आता है तो वह निर्दोष को ही पकड़ कर जेल भेज देती है। ऐसा ही एक निर्दोष शख्स बीते तीन महीने से जेल में बंद है और उसके घर के लोग भूख से बिलबिला रहे हैं। अब मामला कोर्ट में पहुंच गया है। कोर्ट ने थानाध्यक्ष को हाजिर को फरमान जारी किया है।
वहीं थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार का अब भी यही कहना है कि हमने दोषी को ही जेल भेजा है। कोर्ट द्वारा सदेह हाजिर होने की बात कहने पर थानाध्यक्ष ने कहा कोई बात नहीं हाजिर होंगे। लेकिन यह सच नहीं है। सच क्या है इससे अब हम आपको रुबरू कराते हैं।
एक नाम के तीन लोग
दरअसल, गांव में सत्येंद्र के नाम तीन लोग हैं। पहला सत्येंद्र नारायण सिंह पिता मैनेजर यादव, दूसरा सत्येंद्र यादव पिता परमेश्वर यादव और तीसरा सत्येंद्र यादव पिता मैनेजर यादव है। स्वर्गीय परमेश्वर यादव का लड़का सत्येंद्र यादव के ऊपर शराब के अवैध धंधे के मामले में 2019 में मुकदमा हुआ था।
मुकदमा करने वाले भी अतरी पुलिस के वर्तमान थानाध्यक्ष ही थे। लेकिन तब से लेकर जनवरी 2022 तक अतरी पुलिस को भनक तक नहीं लगी। पांच जनवरी को अतरी पुलिस गांव में पहुंची और सत्येंद्र नारायण सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस के इस हरकत से गांव के लोग सत्येंद्र का परिवार सकते में पड़ गया।
पुलिस के डर से गांव वालों ने भी उस समय कुछ भी नहीं बोला। लेकिन उसका परिवार जब भाग दौड़ करना शुरू किया तो गांव के लोगों की भी आंखें खुलीं। सत्येंद्र नारायण सिंह की पत्नी व बच्चे अतरी थाने में गुहार लगाई तो उन्हें गाली-गलौज कर भगा दिया गया।
परिवार वालों ने बड़े अधिकारियों से भी गुहार लगाई
परिवार वालों ने पुलिस के बड़े अधिकारियों के पास भी गुहार लगाई लेकिन जांच का भरोसा देकर उसे टरका दिया। सत्येंद्र के जेल जाने के बाद मुफलिसी में जी रहा सत्येंद्र का परिवार हार नहीं माना। वह किसी तरह से कोर्ट की शरण में पहुंच गया। कोर्ट में मामला। यहां तक इस मामले में गांव के सरपंच ने भी लिखित सत्येंद्र नारायण सिंह व अन्य सत्येंद्र की पुष्टि की है।
पत्नी बोली- पति निर्दोष हैं
इधर, सत्येंद्र नारायण सिंह की पत्नी ने बताया कि उसके पति निर्दोष हैं। वह मजदूर किसान हैं। बटाई पर खेत लेकर खेती करते हैं। जो दोषी व असली सत्येंद्र यादव है। वह खुलेआम गांव में घूम रहा है। और हम व हमारे बाल बच्चे पति के जेल जाने से दाने-दाने के लिए मोहताज गए हैं।
उसने बताया कि इस मामले में बीते दिनों पुलिस आई थी। जांच कर गई है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आरोपी गांव में घूम ही रहा है और मेरे पति जो निर्दोष हैं वह जेल में बंद है। सत्येंद्र नारायण सिंह की पत्नी का कहना है कि जेल भेजने से पूर्व पुलिस को आधार कार्ड मिलाना चाहिए था
या फिर गांव के लोगों से दोषी व निर्दोष के बीच को लेकर तस्दीक करनी चाहिए थी। बगैर जांचे- परखे थानाध्यक्ष ने कैसे हमारे पति को जेल भेज दिया। यह तो हद है। गरीब ऐसे में गरीब कैसे चेन से जी सकेगा। समाज को क्या मुंह दिखाएगा।
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