पंजाब चुनाव: यूं ही नहीं संत रविदास के दर पर दिग्गजों ने टेका मत्था, दलित वोट बैंक है कारण…

पंजाब में विधानसभा चुनाव में कुछ ही दिन बचे हैं। वोटिंग से पहले बुधवार के दिन रविदास जंयती के दिन लगभग सभी दलों के नेताओं ने संत रविदास के दर पर मत्था टेका। इसका सबसे बड़ा कारण है चुनावी राज्य में दलितों की आबादी। 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब में इस समय 2.77 करोड़ दलित आबादी है। वे पंजाब की कुल आबादी का लगभग 32 प्रतिशत हैं।
यह संख्या पंजाब के सबसे प्रमुख समाज जाट सिखों की कुल 20 प्रतिशत आबादी से कहीं अधिक है। पंजाब में दलितों की कुल आबादी में से लगभग 21 प्रतिशत आबादी रविदासिया समुदाय की है। इस आबादी की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि 16 फरवरी को संत रविदास जयंती के कारण पंजाब विधानसभा चुनाव की तारीख 14 फरवरी से बदलकर 20 फरवरी कर दी गई थी।
पंजाब में रविदासिया समुदाय का दोआब क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभुत्व है। रविदासिया समाज से जुड़ा सबसे बड़ा डेरा मुख्य शहर दोआबा जालंधर में है। बुधवार को संत रविदास जयंती के अवसर पर डेरा सचखंड बल्लां में रविदास समाज के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए डेरा के मुख्य प्रवक्ता कुलवंत काजला ने कहा, “दुनिया भर में डेरा सचखंड बल्लान के लगभग 25 लाख अनुयायी हैं। यहां आयोजित सभी सभाओं में कम से कम 10-15 लाख लोग शामिल होते हैं।” हालांकि, कुलवंत काजला ने राजनीति में डेरा की भूमिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “सतगुरु निरंजन दास एकता, समानता और भाईचारे का संदेश देते हैं, वे रविदास जी महाराज की आवाज का प्रचार करते हैं।
” कुलवंत काजला ने कहा, “यह सतगुरु का दरबार है और यहां कोई भी आ सकता है। यहां किसी के आने की मनाही नहीं है। हर कोई दरबार में आता है और सभी का स्वागत किया जाता है, यहां सभी को प्रसाद भी मिलता है। लेकिन हमने कभी किसी खास पार्टी या नेता का समर्थन नहीं किया है। हम चुनाव के दौरान कभी भी राजनीतिक संदेश नहीं देते हैं।”
सरकार से समर्थन के सवाल पर कुलवंत काजला ने कहा, ‘हमें कभी किसी से कुछ मांगने की जरूरत नहीं पड़ी। हमारे महाराज जी खुद सभी को देते हैं। हमने कभी किसी राजनीतिक दल या सरकार से कुछ नहीं मांगा। यह एक धार्मिक डेरा है। हम यहां से केवल रविदास जी महाराज की आवाज का प्रचार करते हैं।”
एएनआई ने इस डेरा के कुछ अनुयायियों से भी बातचीत की। डेरा सचखंड बल्लां के अनुयायी श्यामलाल ने कहा कि ”जब भी नेता या मंत्री यहां आते हैं तो अपनी मर्जी से आते हैं। हम डेरा की तरफ से कभी किसी पार्टी का समर्थन नहीं करते।” आपको बता दें कि दो प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्री इस डेरे से जुड़े प्रमुख मंदिर सतगुरु रविदास धाम पहुंचे।