दुर्ग
बढ़ते सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग और उससे होने वाले बढ़ते बीजे प्रदूषण को रोकने के लिए महापौर ने आज बायोडिग्रेडबल कैरी बैग्स का किया वितरण

दुर्ग / नगर पालिक निगम स्वच्छ भारत मिशन 2022 के तहत, बढ़ते सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग और उससे होने वाले बढ़ते बीजे प्रदूषण को रोकने के लिए महापौर धीरज बाकलीवाल ने बायोडिग्रेडबल कैरी बैग्स की जानकारी देते हुए वितरण किया।
इस अवसर पर सभापति राजेश यादव, स्वास्थ्य विभाग प्रभारी हमीद खोखर,एमआईसी प्रभारी मनदीप सिंह भाटिया,पार्षद श्रद्धा सोनी,एल्डरमेन रत्ना नारमदेव,जगमोहन ढीमर,हरीश साहू,सहायक स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली, पीआईयू शेखर वर्मा के अलावा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रहलाद रूंगटा,कैट के अध्यक्ष मोहम्मद अली हिरानी,उद्योग के अध्यक्ष संजय चौबे,छ. ग. चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष बहादुर अली थारानी व अमर कोटवानी,कैट के कोषा अध्यक्ष आशीष निमजे प्लास्टिक संघ के अध्यक्ष पवन झमानी व उपयोगकर्ताओं से जनसम्पर्क कर पोस्टर व बायोडिग्रेडेबल कैरी बैग दे कर जागरूक किया गया।
निगम के द्वारा नोटिफ़िकेशन आम जनता को जागरूक करने के लिए दुकानों में स्टीकर चिपका कर प्रतिबंधित और उपयोग में आने वाली प्लास्टिक की जानकारी दी गई। स्वच्छ भारत मिशन 2022 के तहत इस प्रकार के जन जागरूकता अभियान से दुर्ग शहर की स्वच्छता रेंकिंग में सुधार होगा।
पर्यावरण कार्यकर्ता लक्ष्मी शर्मा के द्वारा 25000 बायोडिग्रेडेबल बैग वितरण के लिए निगम को निशुल्क उपलब्ध कराया गया। पर्यावरण कार्यकर्ता लक्ष्मी शर्मा पिछले 5 सालों से प्लास्टिक के विकल्प के लिए लोगों को जागरूक कर पर्यावरण के हित में कार्य कर रही है।बायोडिग्रेडेबल कैरी बैग उपयोग करने के बाद खुले वातावरण में फ़ेक दिये जाने पर 180 दिनों में पूर्णतया जैव विघटित हो कर मिट्टी में बदल जाता है।
प्रश्न(1) बायोडिग्रेडेबल क्या है?
कोई भी वस्तु जो खुले वातावरण में जैविक प्रक्रिया से मिट्टी खाद अथवा गैस में बदल जाता है।इस प्रक्रिया को बायोडिग्रेडेशन कहते है। जैसे पेड़ की पत्तियाँ, काग़ज़ ,अन्य बायो कचरा।
बायोडिग्रेरेडेबल कैरी बैग उपयोग करने के बाद खुले वातावरण में फ़ेक दिये जाने पर 180 दिनों में पूर्णतया जैव विघटित हो कर मिट्टी में बदल जाता है।
प्रश्न (2) बायोडिग्रेडेबल से पर्यावरण कैसे बचेगा?
बायोडिग्रेडेबल का उपयोग कर,सिंगल यूज प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग को कम कर पर्यावरण को बचाया जा सकता है।
प्रश्न(3)क्या बायोडिग्रेडेबल महंगा होता है?
जी नही,प्लास्टिक के मुकाबले यह एक सस्ता और पर्यावरण
के अनुकूल है।
*नॉन वोवन क्या है ?*
नॉन वोवन से बने झोले को सिंगल यूज प्लास्टिक की श्रेणी में रखा गया है। इस लिए छत्तीसगढ़ राज्य में नॉन वोवन से बने झोले को पूर्णतया बैन किया गया है। नॉन वोवन झोला सिंथेटिक फाइबर पॉलीप्रोपलीन पीपीई से बने होने के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते है। और नॉन वोवन से स्किन संबंधी बीमारी ,दमा,और कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की संभावना बनी हुई है।
नॉन वोवन के बारीक रेशे जो हमे नग्न आंखों से दिखाई भी नहीं पड़ते है,जो हमारे शरीर में पानी के श्रोत से, हमारी आंखों से , एवम सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करते है। नॉन वोवन जीतना मानव के लिए हानिकारक है ,उतना ही हमारे जीव जंतु ,पेड़ पौधे, और हमारी धरती के लिए भी हानिकारक है।
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