
एक बार फिर वही कहानी। टेस्ट में सीरीज में मात खाने वाली टीम इंडिया वनडे सीरीज में भी बैकफुट पर नजर आई और दक्षिण अफ्रीका में ट्रॉफी जीतने की उसकी उम्मीदें खत्म हो गई। मेजबान टीम के हाथों दूसरा वनडे 7 विकेट से हारने के बाद भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका की धरती पर ना तो टेस्ट सीरीज जीत पाई और ना ही वनडे सीरीज। दोनों सीरीज में मेहमानों की ओर से निराशाजनक प्रदर्शन देखने को मिला। सीरीज का तीसरा वनडे अब केपटाउन में रविवार को खेला जाएगा, जोकि सिर्फ औपचारिकता होगा। सीरीज बचाने के लिए भारत को दूसरे वनडे में हर हाल में जीत दर्ज करनी थी, ऐसा नहीं हो सका क्योंकि ना तो टीम की गेंदबाजी में धार देखने को मिली और ना ही बल्लेबाज टीम की डूबती कराई नैया पार करा सके। आइये, उन 5 बड़ी कारणों पर नजर डालते हैं, जिसकी वजह से भारत को दूसरे वनडे में शिकस्त का सामना करना पड़ा और टीम सीरीज गंवा बैठी।
विराट कोहली का ‘पहली बार‘ बिना खाता खोले पवेलियन लौटना
दूसरे वनडे में विराट कोहली अपना 450वां इंटरनेशनल मैच खेलने उतरे, लेकिन वह खाता खोले बिना पवेलियन लौट गए। विराट वनडे फॉर्मेट में 14 बार बिना खाता खोले पवेलियन लौटे जबकि पहली बार किसी स्पिनर ने उन्हें शून्य पर आउट किया। कोहली के अलावा शिखर धवन 29 रन बनाकर आउट हुए। केएल राहुल ने जरूर फिफ्टी लगाई, लेकिन वह लंबी पारी नहीं खेल सके और 55 रन ही बना सके। टॉप बल्लेबाजों के बड़ा स्कोर नहीं बनाने से मध्यक्रम पर दबाव आ गया।
दोनों अय्यर का फ्लॉप शो जारी
दूसरे वनडे में भी भारतीय टीम का मिडिल ऑर्डर फ्लॉप रहा। वेंकटेश अय्यर और श्रेयस अय्यर बड़ा स्कोर नहीं कर पाए। ऋषभ पंत ने जरूर 85 रन की पारी खेली। लेकिन पांचवें और छठे नंबर पर श्रेयस अय्यर तथा वेंकटेश अय्यर फिर फेल रहे। श्रेयस ने 11 और वेंकटेश ने केवल 22 रन बनाए।
नई गेंद से भारत की गेंदबाजी में धार नहीं दिखी
नई गेंद से भारतीय गेंदबाज शुरुआती सफलता नहीं दिला पाए। गेंदबाजों को पहला विकेट हासिल करने में 22 ओवर लग गए। लेकिन तब तक क्विंटन डिकॉक और जानेमन मलान पहले विकेट के लिए 132 रनों की साझेदारी करके साउथ अफ्रीका की जीत की नींव रख चुके थे। मलान और टेम्बा बावुमा के विकेट गिरने के बाद भी गेंदबाज बाकी बल्लेबाजों को आउट नहीं कर पाए। भुवनेश्वर कुमार बिलकुल भी रंग में नहीं दिखे और अपने शुरुआती 4 ओवर में ही 40 रन लुटा डाले।
बतौर कप्तान केएल राहुल के कुछ फैसले सही नहीं
वनडे सीरीज में बतौर कप्तान केएल राहुल के फैसले की काफी आलोचना हो रहर है। राहुल ने अहम समय पर कुछ ऐसे फैसले लिए, जोकि टीम के हित में नहीं रहे। राहुल ने शार्दुल ठाकुर को तब बॉलिंग से हटा दिया, जब उन्होंने विकेट लिया था। शार्दुल की जगह वेंकटेश अय्यर को गेंदबाजी थमा दी गई। बल्लेबाजी में भी राहुल ने डिफेंसिव रवैया अपनाया। विराट के विकेट गिरने के बाद वह काफी धीमे पड़ गए।
स्पिनरों ने फर्क पैदा किया
भारतीय स्पिनर मैच में कोई खास प्रभाव नहीं डाल पाए। युजवेंद्र चहल ने 10 ओवर के स्पेल में 47 रन देकर एक विकेट लिया जबकि अश्विन तो अपने स्पेल में 68 रन लुटा डाले। वहीं, दक्षिण अफ्रीकी स्पिनरों ने भारत के चार विकेट चटकाए। मेजबान टीम के स्पिनरों ने भारत को बड़ी साझेदारियां करने का मौका नहीं दिया।
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