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भारत-चीन समेत 116 देशों में कोरोना से होने वाली मौतें आंकड़ों से कई गुना ज्यादा, रिपोर्ट का दावा

भारत-चीन समेत 116 प्रमुख देशों में कोरोना से हुई मौतें वास्तविक आंकड़ों से कई गुना ज्यादा हो सकती हैं। आंकड़े बताते हैं कि अब तक कुल 55 लाख मौतों की पुष्टि की गई है। लेकिन वास्तविक आंकड़े चार गुना तक ज्यादा हो सकते हैं। दि इकोनोमिस्ट लंदन के मॉडल के अनुसार, 2.2 करोड़ और इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ मैट्रिक्स एडं एवुलेशन (आईएचएमई) वाशिंगटन के अनुसार 1.8 करोड़ मौतें होने का अनुमान है। जहां तक भारत का प्रश्न है, अभी तक करीब पांच लाख मौतों की पुष्टि सरकार ने की है लेकिन वास्तविक मौतें इससे दस गुना यानी 50 लाख होने का अनुमान इस रिपोर्ट में व्यक्त किया गया है। रिपोर्ट नेचर जर्नल के ताजा अंक में प्रकाशित हुई है।

इस शोधपरक रिपोर्ट में कहा गया है कि देशों ने आंकड़े ठीक से एकत्र नहीं किए। इसके लिए अलग-अलग पैरामीटर तय किए गए। नीदरलैंड ने अस्पताल में मरने वाले कोरोना संक्रमित लोगों की गिनती की तो पड़ोसी बेल्जियम ने जुकाम जैसे लक्षणों से हुई हर मौत को जांच किए बगैर कोरोना से हुई मत्यु करार दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि धनी देशों में मौते के आंकड़े ऊपर रहे और गरीब देशों में कम। लेकिन 116 देशों का वर्ल्ड मोर्टेलिटी डाटासेट (डब्ल्यूएमडी) का विश्लेषण कहता है कि गरीब देशों में मौतें कम दर्ज हुई हैं। मॉडलिंग यह कहती है कि धनी देशों में कोरोना की वास्तविक मौतें मौजूदा आंकड़ों के एक तिहाई के बराबर ज्यादा हो सकती हैं। जबकि गरीब देशों में वास्तविक कोरोना मौतें मौजूदा आंकड़ों से 20 गुना तक ज्यादा हो सकती हैं।

डब्ल्यूएचओ जारी कर सकता है आंकड़ा
रिपोर्ट में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ मौतों को लेकर जल्दी अपना पहला आकलन जारी कर सकता है। इस पर कार्य चल रहा है। रिपोर्ट में कई विशेषज्ञों की राय लेते हुए यह नतीजा निकाला गया है कि कोरोना से हुई वास्तविक मौतों के आकलन के लिए कोरोनाकाल से पहले के पांच सालों की मौतों की तुलना महामारी काल से करनी होगी।

1918-20 के बाद सबसे बड़ी महामारी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोरोना महामारी 1918-20 के दौरान फैली स्पेनिस फ्लू की महामारी के बाद सबसे बड़ी है। तब करीब 7.5 करोड़ लोगों की मौतें हुई थी। 2009 में फ्लू से चार लाख, 1968 में 22 लाख, 1957-59 में 31 लाख लोगों की मौत हुई थी।

भारत में दस गुना ज्यादा
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अब तक करीब पांच लाख मौतें बताई जा रही हैं लेकिन इकोनोमिस्ट का आकलन बताता है कि यह दस गुना ज्यादा 50 लाख तक पहुंच चुकी हैं। चीन के बारे में कहा गया है कि वह 4600 मौतें बताता है लेकिन वहां 7.5 लाख मौतें हो चुकी होंगी जो 150 फीसदी ज्यादा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस, अमेरिका, ब्राजील, मैक्सिको, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, पेरु, मिस्त्र, फिलिपीन्स तथा इटली में वास्तविक मौतों से काफी कम मौतें दर्ज की गई हैं।

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