बेरोजगारी 17 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंची, नई भर्तियां करने की तैयारी में कंपनियां

रोजगार के मोर्चे पर राहत की खबर है। 16 जनवरी को समाप्त सप्ताह में बेरोजगारी दर 17 सप्ताह के निचले स्तर 5.96 फीसदी पर पहुंच गई। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार बेरोजगारी दर में गिरावट की एक वजह कोविड के मामलों में वृद्धि के बीच कम लोगों का काम के लिए आना है। हालांकि, इसके बावजूद शहरी क्षेत्रों में ई-कॉमर्स, खुदरा और स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों जैसे कुछ क्षेत्रों में कार्यबल की मांग अधिक बनी हुई है जिसकी वजह से भी बेरोजगारी घटी है।
सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार 19 सितंबर, 2021 को समाप्त सप्ताह में बेरोजगारी की पिछली निम्न दर 5.89 फीसदी थी। सीएमआईई के मुताबिक इस अवधि में बोरोजगारी की औसत दर 6.1 फीसदी से 8.8 फीसदी के बीच रही। सीएमआईई के एमडी और सीईओ महेश व्यास का कहना है कि श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) गिर गई है। महामारी का प्रभाव श्रम भागीदारी दर पर है जो अब घटकर 40 फीसदी से कम हो गई है। यह काफी समय से 40 फीसदी से ऊपर थी।
दिसंबर के मध्य में यह 41 फीसदी से अधिक थी। ब्यास का कहना है कि जैसे-जैसे एलएफपीआर कम हुआ है, बेरोजगारी दर भी कम हुई है। उल्लेखनीय है कि एलएफपीआर किसी देश की कामकाजी उम्र की आबादी के अनुपात का एक उपाय है जो काम करने या काम की तलाश में श्रम बाजार में सक्रिय रूप से संलग्न है।
खुदरा, ई-कॉमर्स में भर्तियां तेज
मानव संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर भी कंपनियों की भर्ती की योजनाओं को पटरी से नहीं उतार पाई है जो एक सकारात्मक पहलू है और सबसे बड़ी बात कि यह इस दौर में सभी क्षेत्रों में नियुक्तियां बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा, ई-कॉमर्स, स्वास्थ्य सेवा और आईटी क्षेत्रों से मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। साइबर सुरक्षा और नर्सिंग जैसे विशेष कौशल वाले क्षेत्रों में मांग भी तेज है।
शहर और गांवों में घटी बेरोजगारी
सीएमआईई के अनुसार, 16 जनवरी, 2022 को समाप्त सप्ताह में शहरी बेरोजगारी दर आठ फीसदी थी, जबकि 12 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के लिए 10 फीसदी थी। समीक्षाधीन अवधि में ग्रामीण बेरोजगारी दर 7.82 फीसदी से घटकर 4.99 फीसदी पर आ गई है। 2020 में अप्रैल-जून की महामारी की पहली लहर के दौरान, साप्ताहिक बेरोजगारी दर तीन मई को समाप्त सप्ताह में बढ़कर 27.11 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। लेकिन पिछले साल 17 जनवरी को समाप्त सप्ताह में गिरकर 4.66% हो गई थी।
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