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आर-पार की जंग या कूटनीति? ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन पर ट्रंप और जे.डी. वेंस में उभरे मतभेद

वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के चलते हालात काफी खराब हो चुके हैं। ईरान के खिलाफ जहां पूरा यूरोप लामबंद हो गया है वहीं व्हाइट हाउस के अंदरखाने भी ईरान के ऊपर एक्शन को लेकर मतभेद उभर आए हैं।

इस तरह के संकेत भी मिले हैं कि ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन को लेकर प्रेसिडेंट ट्रंप और वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस के बीच मतभेद हैं। ट्रंप, ईरान के ख़िलाफ़ मिलिट्री एक्शन की तैयारी में हैं लेकिन वाइस प्रेसिडेंट जे. डी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ट्रंप को सलाह दी है कि पहले वो डिप्लोमैटिक एक्शन को आज़मा लें।

ईरान के साथ सभी बैठकें रद्द 

इस बात की भी चर्चा है कि ट्रंप अपने दोस्त, स्टीव विटकॉफ को ईरान के अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए भेज सकते हैं। ट्रंप ने कल ख़ुद ही बताया था कि ईरान ने उनसे बातचीत की पेशकश की है। अब से थोड़ी देर पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान की जनता से विरोध प्रदर्शन जारी रखने की अपील की।

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं और वो बहुत जल्दी ईरान के प्रदर्शनकारियों को मदद भेजेंगे। हालांकि, उससे पहले व्हाइट हाउस की प्रवक्ता केरोलाइन लेविट ने  कहा कि प्रेसिडेंट ट्रंप, मिलिट्री एक्शन से पहले डिप्लोमैसी के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश सकते हैं।

कई यूरोपीय देश ईरान के विरोध में आए

उधर, यूरोपीय देश ईरान में सरकार के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में आ गए हैं। फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली ने ईरान से डिप्लोमैटिक रिलेशन्स को डाउन ग्रेड करने का फ़ैसला किया है। फ्रांस ने तेहरान में अपने दूतावास से सारे ग़ैर ज़रूरी स्टाफ को वापस बुला लिया है।

अमेरिका ने भी अपने नागरिकों को जल्दी से जल्दी ईरान छोड़ने को कहा है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान क़तर में अमेरिका के अल उदैयद मिलिट्री बेस में ज़बरदस्त हलचल देखी जा रही है… यहां बड़ी तादाद में, फाइटर jets और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उतर रहे हैं।

ईरान पर बड़ा इकोनॉमिक अटैक 

हालांकि, आज डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एक बड़ा इकोनॉमिक अटैक किया है। ट्रंप ने ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलन किया है। इससे ईरान के लिए इंटरनेशनल ट्रेड करना और भी मुश्किल हो जाएगा।

पिछले 45 साल से लगी पाबंदियों की वजह से ईरान पहले ही दुनिया के तमाम देशों के साथ सीमित व्यापार कर पाता है। ट्रंप के इस अतिरिक्त टैरिफ़ के बाद ईरान के लिए दूसरे देशों को क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट करना मुश्किल हो जाएगा। चीन, रूस और भारत ईरान के बड़े ट्रेड पार्टनर हैं।

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत के साथ ईरान हर साल क़रीब 2 बिलियन डॉलर का कारोबार करता है। भारत, ईरान को बासमती चावल, चाय, चीनी, दवाओं, मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट करता है और ईरान से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, ड्राइ फ्रूट्स, सेब, केमिकल्स और मिनरल्स इंपोर्टकरता है।

भारत, हर साल क़रीब सवा अरब डॉलर का सामान ईरान को बेचता है और क़रीब 44 करोड़ डॉलर का सामान ख़रीदता है। ट्रंप के इस एडिश्नल 25 प्रतिशत टैरिफ़ का मतलब है कि या तो भारत को ईरान से कारोबार बंद करना होगा या फिर अमेरिका को जाने वाले भारत के एक्सपोर्ट पर 25 परसेंट टैरिफ और लगेगा।

ट्रंप ने पहले ही भारत के एक्सपोर्ट पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है। अगर ये बढ़कर 75 परसेंट हो जाए तो भारत के लिए अमेरिका के साथ ट्रेड मुश्किल हो जाएगा। इसलिए अब ईरान के साथ व्यापार करने वाले भारत समेत दूसरे देशों को मुश्किल होगी।

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