कोरोना

कोरोना अब और भी खतरनाक

कोरोना के नए शोध व लक्षण

कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दे रही है। इस बार प्रसार पिछली लहर के मुकाबले भी तेज है। देशभर में दिन-ब-दिन कोरोना के आंकड़ों में वृद्धि हो रही है। पहली लहर की तुलना में कोरोना बेहद ताकतवर बनकर सामने आया है और इस बार तो लक्षण भी बदल गए हैं। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा लक्षणों ने ही डराया है। पिछली बार की तुलना में सबकुछ बदला है। सर्दी खांंसी, बदन दर्द तो पहले की ही तरह है लेकिन कुछ और चीजेें भी लक्षणों के तौर पर शामिल हुुुईं हैं, जिन्हें कोरोना के नए लक्षण माना जा रहा हैै।

चिकित्सकों के अनुसार पहले कुछ गिने-चुने लक्षणों से मरीज स्वयं पहचान पा रहे थे कि उन्हें कोरोना की संभावनाएं लग रही हैं लेकिन आज की तारीख में लक्षणों के आधार पर तय कर पाना कि कोरोना है या नहीं बहुत मुश्किल हो चुका है। आइए जानते हैं विशेषज्ञ से कोरोना की दूसरी लहर में सामने आने वाले नए लक्षण क्या हैं? किस तरह सेे आप इन्हें समझ सकतेे हैंं और समय रहतेे सावधान हो सकते हैं।

जांच के बिना पता लगाना मुश्किल
चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ.दिलीप सिंह चावड़ा के मुताबिक पिछले एक साल से वे कोरोना के कई मरीजों को देख चुके हैं, लेकिन पूरे साल में जहां आंकड़ों में बदलाव होते रहे हैं, वहीं साथ ही कोरोना के लक्षण भी कभी स्थिर नहीं रहे हैं। जहां शुरुआत में जुकाम, बुखार, खांसी आदि लक्षणों के आधार पर मरीज को जांच कराने की सलाह दी जाती थी, वहीं आज कई सारे लक्षण हैं, जो मरीज के शरीर में लंबे समय तक हैं तो उसे जांच कराना ही पड़ रही है। जांच के बिना तो यह कह पाना कि किसी मरीज को कोरोना नहीं है, बहुत मुश्किल है।

बिना लक्षणों वाले मरीजों की संख्या है अधिक
जब से कोरोना की दूसरी लहर आई है, बिना लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। युवाओं में ऐसे मरीजों की संख्या अधिक है। यदि किसी घर के एक या दो सदस्यों में कोरोना के कोई लक्षण दिखाई देते हैं तो उस घर के स्वस्थ और युवा सदस्य अक्सर बिना किसी लक्षण के भी कोरोना पॉजिटिव आते हैं। हालांकि इन मरीजों में तरह-तरह के पोस्ट कोरोना लक्षण जरूर देखे जा रहे हैं।

यह लक्षण है दूसरी लहर में सामान्य
कोरोना की दूसरी लहर में कुछ नए लक्षण ऐसे देखने में आ रहे हैं,जो पहले भी लोगों में दिख तो रहे थे, लेकिन असामान्य थे। अब ये लक्षण बेहद सामान्य हो चुके हैं।

पेट दर्द या बेचैनी
गर्मियों के मौसम में बेचैनी, घबराहट आदि को बहुत सामान्य माना जाता है और लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन कई सारे मरीज पिछले दिनों ऐसे भी देखने में आए हैं जो इन लक्षणों की शिकायत के बाद कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

पेट दर्द और दस्त के लक्षण भी कई मरीजों में देखे जा रहे हैं। ऐसे में किसी भी मरीज को यदि दो या तीन दिन से अधिक यह समस्या रहती है तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

मांसपेशियों में दर्द एवं कमजोरी
कमजोरी भी कोरोना के लक्षणों में शामिल है। कई सारे मरीज बताते हैं कि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि वे आलस्य का शिकार हो चुके हैं। उनके शरीर में ऊर्जा ही नहीं है। यदि वे एक जगह बैठे हैं तो वहां से एक से दो घंटे तक उठ नहीं पाते हैं। ज्यादा दूर चलने पर थकान महसूस कर रहे हैं। मासंपेशियों में दर्द बना हुआ है। ऐसे मरीजों को भी तुरंत कोरोना की जांच करवाने का परामर्श दिया जा रहा है।

भूख न लगना और मानसिक सेहत पर असर
जहां पहले कोरोना के पोस्ट लक्षणों में यह देखा जा रहा था कि मानसिक रूप से मरीज खुद को अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं। अब यह पोस्ट लक्षण मुख्य लक्षणों के श्रेणी में आ चुका है। मरीजों के व्यवहार में भी चिड़चिड़ापन देखा जा रहा है। कोरोना वायरस शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से मरीज को कमजोर कर रहा है। अचानक से स्वस्थ व्यक्ति की भूख में कमी आ जाना भी कोरोना के नए लक्षणों में से एक है।

नया वेरिएंट है अधिक खतरनाक
कोरोना का नया वेरिएंट बहुत खतरनाक है इसलिए यह न सिर्फ श्वसन प्रणाली पर हमला कर रहा है बल्कि अलग-अलग मरीजों पर तरह-तरह से प्रभावित कर रहा है। यही वजह है कि खांसी, सर्दी, श्वास संबंधी लक्षणों के अलावा भी कई लक्षण लोगों में नजर आ रहे हैं। ऐसे में किसी भी लक्षण को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। कई मरीज तो स्वस्थ होने में सामान्य की तुलना में बहुत अधिक समय ले रहे हैं। ऐसे मरीज जिन्हें कोरोना के साथ निमोनिया भी हो रहा है, उन्हें ठीक होने में काफी लंबा समय लग रहा है।

विटामिन-सी का सेवन है बहुत आवश्यक
कोरोना विशेषज्ञ का कहना है कि हम सभी जानते हैं कि शुरुआत से ही इस वायरस से बचना इसलिए मुश्किल हो रहा है क्योंकि यह दिखाई नहीं देता है। ऐसे में यदि आप मास्क, सैनेटाइजर को लेकर थोड़े भी लापरवाह हुए कि इसकी गिरफ्त में चले जाते हैंं इसलिए जरूरी है कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करें। गर्मियों में संतरे आसानी से उपलब्ध होते हैं, उनका सेवन करें। काढ़े की आदत को खत्म न करें, कोरोना से लड़ने के लिए उसे जारी रखना आवश्यक है।

नोट- यह लेख एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड एमवाय ग्रुप के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर दिलीप सिंह चावड़ा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर दिलीप सिंह चावड़ा पिछले सात सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्री एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर से ली है।

 

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