छत्तीसगढ़दुर्ग

अमृत सरोवर तालाब निर्माण से आजीविका गतिविधि से हो रहा महिलाओं को लाभ…

दुर्ग – ग्राम पंचायत बोरिंदा के अमृत सरोवर में महिलाओं द्वारा मछली पालन, आजीविका का बना सशक्त माध्यम जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत बोरिंदा में निर्मित अमृत सरोवर अब ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का केंद्र बन चुका है। यहाँ शीतल स्वास्थ्य समूह की 12 महिला सदस्यों द्वारा संगठित रूप से मछली पालन का कार्य किया जा रहा है।

जनपद पंचायत पाटन के अंतर्गत ग्राम पंचायत बोरिंदा में अमृत सरोवर अब केवल जल संरक्षण का माध्यम ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए आजीविका का भी मजबूत स्रोत बनता जा रहा है। मनरेगा योजना के तहत निर्मित इस अमृत सरोवर में अब मछली पालन जैसी आयमूलक गतिविधियों की शुरुआत की गई है।

इस पहल के अंतर्गत अमृत सरोवर में 1,00,000 से अधिक मछलियों का संचयन (बीज) किया गया है। मछलियों के लिए उचित आहार (बीज/फीड) भी डाला जा रहा है, जिससे उनके संतुलित विकास और उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित हो सके। इस आजीविका गतिविधि से जुड़ी महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और गांव में महिला सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।

शीतल समूह की सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस कार्य से नियमित आमदनी होने की आशा है, और भविष्य में वे मत्स्य उत्पादन को व्यवसायिक स्तर तक ले जाने की योजना बना रही हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंगी कुमार दुबे ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “अमृत सरोवर केवल जल संरक्षण का नहीं, बल्कि आजीविका संवर्धन और महिला सशक्तिकरण का भी सशक्त माध्यम बन सकता है।

बोरिंडा की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिखाया है।” यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए स्वरोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और अन्य पंचायतों के लिए अनुकरणीय मॉडल बन चुकी है। अमृत सरोवर में मछली पालन शुरू करके ग्राम पंचायत बोरिंडा ने इस दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है।”

अटल चौक पारा ( सिंचाई 10-15 एकड़) मछ्ली पालन, 10000 घन मीटर जल भंडारण जय मां शीतला समूह में 12 सदस्य (8 महिला, 4 पुरुष) है। वे सरोवर के प्रबंधन के साथ-साथ मछली पालन का कार्य कर रहे है जिसमे उनके द्वारा 01 लाख हजार मछली डाला गया है

एवं किसान सिंचाई करके खरीफ एवं रबी सीजन में फसल उत्पादन कर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते है, जल संरक्षण के लिये चिन्हित किये गये अमृत सरोवर तालाब के किनारें पर 60 पौधा लगाया गया है, जिसमें आम, बरगद, पीपल, नीम, बादाम, अशोक के पेड़ों के पौधों का रोपण किया गया।

इस अमृत सरोवर में समूह के द्वारा मछली पालन का कार्य प्रारम्भ कर दिया है, जिससे उनकी आमदनी का नया रास्ता खुला है, ग्रामवासी अपने खेत की सिंचाई लगभग 10-15 एकड़ कर पा रहे है जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि हो रहा है, नया तालाब में लगभग 10000 घन मीटर पानी का भण्डारण कर सकता है।

तालाब निर्माण के बाद पास की जमीन में नमी की मात्रा में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। जिले में 123 अमृत सरोवर विकसित दृ 65 सरोवरों में प्रारंभ हुई आजीविका गतिविधियाँ जिले में अब तक 123 अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा चुका है। इनमें से 65 अमृत सरोवरों में महिलाओं द्वारा आजीविका गतिविधियाँ प्रारंभ की गई हैं।

राशि 65 हजार रू. का लाभ हो रहा हैं प्रत्येक समूह में 10 महिलाएं कार्य कर रही हैं, जिसके तहत कुल 650 महिलाएं वर्तमान में इन तालाबों में मछली पालन का कार्य कर रही हैं। यह पहल न केवल ग्रामीण आजीविका को सशक्त कर रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक प्रभावी कदम है।

इसके साथ ही, मछलियों को सुखाने की सुविधा हेतु अमृत सरोवरों के किनारे चबूतरे का निर्माण भी किया गया है, जिससे महिलाओं को प्रसंस्करण और विपणन में सहूलियत मिल सके। ग्रामवासियों द्वारा किए जा रहे मछली पालन से न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि ग्राम पंचायत की आय में भी वृद्धि हो रही है। यह पहल ग्राम के बेरोजगार युवाओं के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बन गई है।

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